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बिहार में जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियम, 21 दिनों के अंदर कराना होगा रजिस्ट्रेशन, देरी पर बढ़ेंगी मुश्किलें

Published: Thu, 29 Oct 2026 11:00 PM (IST)

सिकटी, अररिया में जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए और सख्त नियमों से आम जनता को काफी परेशानी हो रही है, खासकर विलंबित मामलों में।

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर 

HighLights

  1. जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियमों से आम जनता परेशान।

  2. विलंबित पंजीकरण के लिए अब न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य।

  3. सिकटी बीडीओ ने जिलाधिकारी को स्थिति से अवगत कराया।

संवाद सूत्र, सिकटी (अररिया)। जन्म एवं मृत्यु के विलंबित (लेट) पंजीकरण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के कारण अररिया जिले के सिकटी प्रखंड क्षेत्र में आम जनता की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि नए नियमों के तहत अब तक प्रमाणपत्र न बन पाने के कारण ग्रामीण रोजाना प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

सिकटी के बीडीओ प्रियदर्शी राजेश पायरट ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि नए प्रावधानों और उत्पन्न हो रही व्यावहारिक कठिनाइयों को लेकर जिलाधिकारी को अवगत करा दिया गया है, और वहां से दिशा-निर्देश प्राप्त होने के बाद प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।

क्या हैं जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के नए प्रावधान

नए संशोधित प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। इसके तहत एक वर्ष से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में पंजीकरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में पूरी तरह बदल गई है और इसे अधिक सख्त बना दिया गया है:

  • 21 दिनों के भीतर: घटना के 21 दिनों के अंदर संबंधित नगर निकाय या ग्राम पंचायत के माध्यम से नि:शुल्क या सामान्य प्रक्रिया के तहत पंजीकरण कराया जा सकता है।

  • 21 से 30 दिन: इस अवधि के भीतर आवेदन करने पर निर्धारित विलंब शुल्क और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं।

  • 30 दिन से 1 वर्ष तक: इस समयावधि में विलंब होने पर जिला रजिस्ट्रार या संबंधित प्राधिकृत अधिकारी की लिखित अनुमति, विलंब का कारण और निर्धारित शुल्क देना अनिवार्य किया गया है।

  • 1 से 2 वर्ष पुराने मामले: नए 2026 संशोधन के अनुसार, एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर के मामलों के लिए संबंधित क्षेत्र के जिलाधिकारी (DM), अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) या अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी के आदेश का प्रावधान किया गया है। आदेश देने से पहले वास्तविकता का सत्यापन किया जाता है।

  • 2 वर्ष से अधिक पुराने मामले (सबसे बड़ा बदलाव): दो साल से पुराने मामलों में अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate 1st Class) का आदेश अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे मामलों में आवेदक को अदालत में याचिका दाखिल करनी होगी, साक्ष्य व दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे और मजिस्ट्रेट द्वारा सत्यता की पुष्टि के बाद ही पंजीकरण का आदेश जारी होगा।

  • कागजी पेच और जनता की परेशानी

    सरकार के इस नए प्रावधान से आम जनमानस में खासी नाराजगी और असमंजस की स्थिति है। एक तरफ जहां ग्रामीण प्रक्रिया की जटिलता और कोर्ट-कचहरी के चक्कर से परेशान हैं, वहीं स्थानीय स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में ब्लॉक कार्यालयों में भी काम ठप पड़े हैं।

    सिकटी बीडीओ द्वारा जिलाधिकारी को स्थिति से अवगत कराए जाने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही प्रशासनिक स्तर पर कोई व्यावहारिक समाधान निकलेगा, जिससे प्रमाण पत्रों के लिए भटक रहे लोगों को राहत मिल सके।

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