आजादी के दशकों बाद भी पुल का इंतजार, अररिया में सुरसर नदी पर चचरी के सहारे सफर, कब बदलेगी 10 हजार लोगों की तस्वीर
अररिया के पथराहा और मानिकपुर पंचायतों के बीच सुरसर नदी पर पक्के पुल का निर्माण न होने से 10 हजार ...और पढ़ें

अररिया के नरपतगंज में सुरसर नदी पर बने चचरी पुल के सहारे आवागमन करते ग्रामीण।
HighLights
10 हजार लोग चचरी पुल पर निर्भर, जोखिम भरा आवागमन।
आजादी के बाद से पक्के पुल की मांग अधूरी।
मानसून में आवागमन ठप, मरीजों को भारी परेशानी।
संवाद सूत्र,फुलकाहा (अररिया)। अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड अंतर्गत पथराहा और मानिकपुर पंचायत के बीच बहने वाली सुरसर नदी पर आज भी पक्के पुल का निर्माण नहीं हो सका है।
इसके कारण दोनों पंचायतों के करीब 10 हजार लोगों की जिंदगी हर दिन जोखिम में गुजर रही है। ग्रामीण आजादी के बाद से ही यहां एक पक्के पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते उनकी यह उम्मीद अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
परिणामस्वरूप, दोनों तरफ के हजारों लोग आज भी अपने ही स्तर पर चंदा जुटाकर बनाए गए अस्थायी चचरी पुल के सहारे आवागमन करने को विवश हैं।
चंदा और बांस-बल्ली के सहारे चल रही जिंदगी
पथराहा पंचायत के छह वार्ड और मानिकपुर पंचायत के तीन वार्ड के लोगों की आवाजाही पूरी तरह इसी चचरी पुल पर टिकी हुई है। लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में फैले इन इलाकों के लोगों को बाजार, स्कूल और जरूरी कामकाज के लिए रोजाना नदी पार करनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने खुद बांस और स्थानीय संसाधनों से यह पुल तैयार किया है, जिसकी हर चार महीने पर चंदा इकट्ठा कर मरम्मत करानी पड़ती है। लेकिन मानसून के दिनों में जब सुरसर नदी का जलस्तर बढ़ता है।
तो यह चचरी पुल पूरी तरह पानी में डूब जाता है। इससे न केवल आवागमन ठप हो जाता है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी करीब दो महीने तक प्रभावित होती है।
मरीजों के लिए जानलेवा साबित होता है पुल का अभाव
पक्के पुल के न होने से सबसे बड़ी मुसीबत बीमारों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के सामने आती है। गांव में किसी की तबीयत बिगड़ने पर एम्बुलेंस सीधे घर तक नहीं पहुँच पाती।
ग्रामीणों को मरीज को खाट पर लादकर जोखिम भरे चचरी पुल के सहारे नदी पार करानी पड़ती है, तब जाकर वाहन की व्यवस्था हो पाती है। रात के समय स्थिति और भी डरावनी हो जाती है।
इसके अलावा, शादी-विवाह जैसे आयोजनों में भी लोगों को भारी फजीहत झेलनी पड़ती है, यहाँ तक कि नई दुल्हनों को भी पैदल ही चचरी पुल पार करना पड़ता है।
जनप्रतिनिधियों के आश्वासन और जमीनी हकीकत
ग्रामीणों का कहना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान सुरसर नदी पर पुल का मुद्दा सबसे बड़ा चुनावी वादा बनता है। नेता आते हैं, आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही सब भूल जाते हैं।
इस संबंध में पथराहा पंचायत की मुखिया रुखसाना प्रवीण ने बताया कि ग्रामीणों की इस समस्या को लेकर कई बार सांसद, विधायक और जिला पदाधिकारी को आवेदन दिया गया है।
पहले पुल का टेंडर होने का आश्वासन मिला था, लेकिन धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ। वहीं, स्थानीय विधायक देवंती यादव ने आश्वस्त किया है कि पुल का निर्माण बहुत जल्द होगा, इसके लिए विभाग के इंजीनियर को जांच के लिए कहा जा रहा है।
