पिता चलाते हैं साइकिल दुकान, बेटी मौसमी ने ऑल इंडिया 1796वीं रैंक लाकर बनीं Officer, मां बोली- लक्ष्मी है मेरी लाडो
Araria Mousami Kumari Success Story: अररिया की मौसमी कुमारी ने अपने पिता की साइकिल दुकान के बावजूद कड़ी मेहनत से ...और पढ़ें

Araria Mousami Kumari Success Story: साइकिल दुकानदार की बेटी बनी अफसर! मौसमी ने ऑल इंडिया 1796वीं रैंक पाकर रचा इतिहास
HighLights
मौसमी कुमारी ने ऑल इंडिया 1796वीं रैंक हासिल की।
पिता की साइकिल दुकान के बावजूद बनीं अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी।
कड़ी मेहनत और लगन से अररिया का नाम रोशन किया।
संवाद सूत्र, रानीगंज (अररिया)। Araria Mousami Kumari Success Story: घर की आर्थिक स्थिति चाहे कितनी भी साधारण क्यों न हो, लेकिन यदि इरादे फौलादी हों और सपनों को पूरा करने का अटूट संकल्प हो, तो सफलता मंजिल बनकर कदम चूमती है। अररिया जिले के रानीगंज की होनहार बेटी मौसमी कुमारी ने इस कथन को पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है।
पिता की छोटी सी साइकिल मरम्मत की दुकान के सहारे चलने वाले परिवार में पली-बढ़ी मौसमी ने अपनी कठिन मेहनत, अनुशासन और लगन के बल पर ऑल इंडिया स्तर पर 1796वीं रैंक हासिल कर पूरे जिले का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है।
पिता की साइकिल दुकान और बेटी का बड़ा ख्वाब
रानीगंज नगर पंचायत के वार्ड संख्या सात निवासी शंकर प्रसाद मंडल अपनी आजीविका चलाने के लिए साइकिल की दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी पत्नी सरोजनी देवी एक कुशल गृहिणी हैं। माता-पिता की इकलौती संतान होने के नाते मौसमी ने बचपन से ही परिवार के संघर्षों को बहुत करीब से देखा था।
उन्होंने कभी भी आर्थिक अभावों को अपनी पढ़ाई के रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी प्रारंभिक और स्नातक स्तर की पढ़ाई स्थानीय कलावती महाविद्यालय से पूरी की और उसके बाद उच्च शिक्षा (बीएससी) के लिए दिल्ली का रुख किया।
अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी पद पर चयन, पूरा हुआ मां-बाप का सपना
पिता दिनभर साइकिल दुकान पर पसीना बहाकर बेटी की फीस और किताबों की व्यवस्था करते रहे, वहीं मौसमी ने भी कमरे में खुद को किताबों के बीच समर्पित कर दिया। आखिरकार उनकी यह तपस्या रंग लाई और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में 1796वीं ऑल इंडिया रैंक प्राप्त कर अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवाया।
वर्तमान में मौसमी अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी (Minority Welfare Officer) के पद पर चयनित होकर विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उनकी इस स्वर्णिम सफलता से माता-पिता का वर्षों पुराना सपना साकार हो गया है और पूरे इलाके में खुशी का माहौल है।
'दृढ़ निश्चय और नियमित अध्ययन ही सफलता की असली कुंजी'
अपनी शानदार उपलब्धि पर मौसमी कुमारी का कहना है कि उनकी सफलता का पूरा श्रेय माता-पिता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और उनकी अपनी निरंतर मेहनत को जाता है। उन्होंने कहा, "परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर आपका लक्ष्य स्पष्ट है और आप नियमित अध्ययन करते हैं तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।"
दैनिक जागरण के विशेष अभियान 'लक्ष्मी मेरी लाडो' के तहत मौसमी की यह गौरवमयी यात्रा समाज की उन तमाम बेटियों के लिए एक जीवंत मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बीच आसमान छूने का ख्वाब देखती हैं। एक साइकिल दुकानदार की बेटी ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।