DigiLocker और mParivahan में ड्राइविंग लाइसेंस होने पर क्या ट्रैफिक पुलिस मांग सकती है ओरिजिनल कॉपी? जानें क्या हैं आपके अधिकार
DigiLocker और mParivahan के आधिकारिक, सत्यापन योग्य कागजात सामान्य जांच में फिजिकल कागजात का विकल्प हैं, लेकिन स्क्रीनशॉट पर्याप्त नहीं।

डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। कल्पना कीजिए की अप अपनी कार, मोटरसाइकिल या स्कूटर से कहीं जा रहे हैं और रास्ते में ट्रैफिक पुलिस आपको रोकर आपसे ड्राइविंग लाइसेंस दिखाने के लिए बोले। इस दौरान आप अपना स्मार्टफोन जेब से निकालते हैं और mParivahan या DigiLocker ऐप खोलकर डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस ट्रैफिक पुलिस को दिखाते हैं। ड्राइविंग से जुड़े सभी कागजात आप उन्हें दिखा देते हैं, इसके बावजूद वह आपसे ओरिजनल ड्राइविंग लाइसेंस मांगते हैं। ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या आपको हर समय अपना फिजिकल ड्राइविंग लाइसेंस साथ रखना जरूरी है? हम यहां पर आपको इसी सवाल का जवाब दे रहे हैं। साथ ही आपको आपको कुछ कानूनी अधिकार के बारे में विस्तार में बता रहे हैं।
डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस को लिए क्या है नियम?
ट्रैफिक निययों के मुताबिक, ज्यादातर सामान्य ट्रैफिक चेकिंग के दौरान आपको ओरिजिनल ड्राइविंग लाइसेंस दिखाना नहीं पड़ता है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 139 के तहत निर्धारित वाहन कागजातों को आप डिजिटल रूप से अपने ड्राइविंग संबंधित कागजात दिखा सकते हैं। इसमें DigiLocker और mParivahan जैसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध डिजिटल कागजात शामिल हैं। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि आपके कागजात सही हो और उनका सत्यापन किया जा सकें।
दस्तावेज या फॉर्मेट | क्या ट्रैफिक पुलिस इसे स्वीकार कर सकती है? | आपको क्या जानना चाहिए? |
|---|---|---|
DigiLocker के Issued Documents सेक्शन में ड्राइविंग लाइसेंस | हां | आधिकारिक रूप से जारी डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस को फिजिकल लाइसेंस के स्थान पर मान्यता प्राप्त है। |
mParivahan में वर्चुअल ड्राइविंग लाइसेंस | हां | अधिकारी द्वारा सत्यापन के लिए आधिकारिक लाइसेंस रिकॉर्ड दिखाएं। |
DigiLocker या mParivahan में RC | हां | आधिकारिक डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) फिजिकल RC की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है। |
आधिकारिक डिजिटल रिकॉर्ड में वैध इंश्योरेंस की जानकारी | हां | इंश्योरेंस पॉलिसी वैध होनी चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल सिस्टम में पॉलिसी की जानकारी उपलब्ध होने पर फिजिकल कॉपी पर जोर नहीं दिया जाना चाहिए। |
आधिकारिक डिजिटल रिकॉर्ड में PUC सर्टिफिकेट | हां, जहां उपलब्ध और सत्यापन योग्य हो | सुनिश्चित करें कि PUC सर्टिफिकेट वैध हो और उसकी जानकारी सत्यापित की जा सके। |
DigiLocker के Drive या Uploaded Documents सेक्शन में खुद अपलोड किए गए दस्तावेज | अपने आप मान्य नहीं | यूजर द्वारा अपलोड किया गया स्कैन, संबंधित प्राधिकरण द्वारा जारी आधिकारिक डिजिटल दस्तावेज के समान नहीं है। |
फोन की गैलरी में DL या RC की फोटो | आधिकारिक डिजिटल दस्तावेज का विकल्प नहीं | यह जानकारी देखने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे आधिकारिक डिजिटल दस्तावेज का प्रमाण नहीं मानना चाहिए। |
ड्राइविंग लाइसेंस या RC का स्क्रीनशॉट | विश्वसनीय विकल्प नहीं | स्क्रीनशॉट में आधिकारिक रिकॉर्ड जैसी सत्यापन सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकती। |
ओरिजिनल फिजिकल ड्राइविंग लाइसेंस या RC | हां | फिजिकल दस्तावेज अब भी वैध हैं और आप चाहें तो इन्हें अपने साथ रख सकते हैं। |
क्या फोन में सेव ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो भी मान्य है?
अब आपको एक बात समझना जरूरी है। आधिकारिक डिजिटल कागजात और ड्राइविंग लाइसेंस की सामान्य फोटो या स्क्रीनशॉट को एक जैसे नहीं माने जाते हैं। अगर आपके स्मार्टफोन में ड्राइविंग से संबंधित कागजात आपकी गैलरी में सेव फोटो, WhatsApp पर आया PDF या किसी कागजात का स्कैन आधिकारिक डिजिटल रिकॉर्ड नहीं माना जाता है। इसलिए अगर आप ट्रैफिक पुलिस को कागजात दिखा रहे हैं, तो उसके लिए DigiLocker के Issued Documents सेक्शन या mParivahan में उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड का इस्तेमाल करें।
डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस को कानूनी मान्यता देने वाले नियम
भारत में डिजिटल वाहन कागजातों की वैलिडिटी को बताने के लिए तीन कानूनी प्रावधान जरूरी है।
- केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 का नियम 139: नवंबर 2018 में संशोधित केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 का नियम 139 वाहन चालकों और कंडक्टरों को निर्धारित कागजात फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक रूप में दिखाने की परमिशन है। इन कागजातों में ड्राइविंग लाइसेंल (DL), रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), इंश्योरेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) शाामिल है। इस नियम के तहत वर्दी में मौजूद कोई भी पुलिस अधिकारी (कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, एएसआई, एसआई या इंस्पेक्टर) इन्हें देखने के लिए आपके से मांग सकता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 4: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 4 इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को मान्यता देती है। यह उन स्थितियों में लागू होती है, जहां किसी कानून के तहत जानकारी लिखित या प्रिंटेड रूप दिखाना जरूरी होता है। साथ ही कुछ शर्तों को भी पूरा करना होता है। हालांककि, इसका यह मतलब नहीं है कि किसी भी कागजात की फोटो स्क्रीनशॉट या अनधिकृत PDF को सरकारी कागजात के बराबर मान लिया जाएगा।
- DigiLocker नियमों का नियम 9A: DigiLocker नियम, 2016 का नियम 9A DigiLocker के जरिए जारी डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक रूप से कागजातों को फिजिकल डॉक्यूमेंट के बराबर की मान्यता दी गई है। इसलिए DigiLocker में मौजूद सेक्शन से जारी कागजातों का इस्तेमाल करना चाहिए। खुद अपने स्मार्टफोन में फोटो या स्कैन कॉपी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
किन परिस्थितियों में ट्रैफिक पुलिस फिजिकल कागजातों की मांग नहीं कर सकती?
अगरर आपके पास DigiLocker या mParivahan में सही और सत्यापन योग्य कागजात हैं, तो आप कई परिस्थितियों में इन्हें फिजिकल कागजात की जगह पर इन्हें दिखा सकते हैं।
- सामान्य ट्रैफिक चेकिंग के दौरान: अगर ट्रैफिक पुलिस आपको सामान्य चेकिंग के लिए रोकती है, तो आप अपना आधिकारिक डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस दिखा सकते हैं। इसी तरह से आप अपने वाहन का RC, इंश्योरेंस और अन्य लागू कागजात भी DigiLocker या mParivahan के जरिए दिखा सकते हैं।
- डिजिटल RC और इंश्योरेंस: अपने वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) और इंश्योरेंस के कागजातों को भी आप आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए दिखा सकते हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के मुताबिक, अगर Parivahan या संबंधित आधिकारिक सिस्टम में वैध इंश्योरेंस पॉलिसी के कागजात हैं, तो आप ट्रैफिक पुलिस अधिकरी को दिखा सकते हैं और वह केवल फिजिकल इंश्योरेंस कॉपी की मांग नहीं कर सकते हैं।
- कागजातों का सत्यापन: ट्रैफिक पुलिस अधिकारी आपके ड्राइविंग लाइसेंस, RC या इंश्योरेंस की वास्तविकता और वैधता की जांच कर सकता है। अगर उनकी सत्यता सही निकल जाती है, तो वह फिजिकल कागजात आपसे नहीं मांग नहीं सकते हैं। इसके साथ ही कागजात में QR कोड या सत्यापन की दूसरी सुविधा दी गई है, तो उसे भी दिखा सकते हैं।
- ट्रैफिक नियम तोड़ने पर लाइसेंस जब्त करने की कार्रवाई: बहुत से लोगों को लगता है कि अगर उन्होंने ऐसा ट्रैफिक नियम तोड़ा, जिसकी वजह से उनका ड्राइविंग लाइसेंस जब्त हो सकता है। ऐसे में उन्हें अपना ओरिजनल लाइसेंस अधिकारी को सौंपना पड़ेगा। हालांकि, ऐसा हप मामले में जरूरी नहीं है।
किन परिस्थितियों में ट्रैफिक पुलिस आपके डिजिटल कागजातों पर सवाल उठा सकती है?
डिजिटल कागजातों को मान्यता जरूर मिली है, लेकिन उन्हें सही तरीके से प्रस्तुत करना और सत्यापन के लिए उपलब्ध कराना भी जरूरी है। कुछ परिस्थितियों में पुलिस आपके डिजिटल कागजातों पर सवाल उठा सकती है।
- गैलरी में मौजूद फोटो या स्क्रीनशॉट दिखाने पर: जैसा हमने आपको ऊपर बताया कि अगर आप ट्रैफिक पुलिस को ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो, mParivahan का स्क्रीनशॉट या WhatsApp पर आया PDF दिखाते हैं, तो उसे आधिकारिक डिजिटल कागजात नहीं माना जा सकता। ऐसे कागजातों की वास्तविकता और वैधता की पुष्टि करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए DigiLocker के Issued Documents सेक्शन या mParivahan के जरिए ही ड्राइविंग से जुड़े कागजातों को दिखाएं।
- मोबाइल फोन बंद होने या ऐप नहीं खुलने पर: कभी-कभी मोबाइल की बैटरी खत्म हो जाती है, ऐप क्रैश हो जाता है या फोन की स्क्रीन काम करना बंद कर देती है। ऐसी स्थिति में आप ट्रैफिक पुलिस को डिजिटल कागजात नहीं दिखा पाते। इसका यह मतलब नहीं है कि डिजिटल कागजातों की कानूनी मान्यता खत्म हो गई है, लेकिन अधिकारी के लिए आपके रिकॉर्ड का सत्यापन करना मुश्किल हो सकता है और जांच में अधिक समय लग सकता है। इससे बचने के लिए यात्रा से पहले फोन चार्ज रखें। जरूरत पड़ने पर फिजिकल कागजातों की बैकअप कॉपी रखना भी उपयोगी हो सकता है।
- इंटरनेट या नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होने पर: कई बार खराब नेटवर्क के कारण DigiLocker या mParivahan में कागजात लोड नहीं हो पाते। खासकर उन इलाकों में यह समस्या हो सकती है, जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर है। अधिकारी के सत्यापन सिस्टम में भी कनेक्टिविटी की समस्या आ सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपका वैध डिजिटल कागजात अमान्य हो गया है। हालांकि, सत्यापन में परेशानी हो सकती है। इसलिए लंबी यात्रा पर निकलने से पहले अपने कागजात ऐप में खोलकर देख लें। ऐसे इलाकों में नियमित यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए फिजिकल कागजातों की बैकअप कॉपी रखना व्यावहारिक हो सकता है।
- ड्राइविंग लाइसेंस या वाहन की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने पर: कुछ पुराने ड्राइविंग लाइसेंस केंद्रीय डेटाबेस में दिखाई नहीं देते। इसके अलावा, सरकारी रिकॉर्ड में गलत या पुरानी जानकारी भी दर्ज हो सकती है। इसी तरह हाल ही में रिन्यू कराया गया इंश्योरेंस या अपडेट की गई वाहन संबंधी जानकारी ऑनलाइन दिखाई देने में समय ले सकती है। अगर यदि आपका कागजात आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित RTO या जारी करने वाले प्राधिकरण से संपर्क करके रिकॉर्ड अपडेट कराएं। जब तक ऑनलाइन रिकॉर्ड ठीक नहीं हो जाता, तब तक फिजिकल कागजात अपने पास रखना सड़क पर होने वाली जांच को आसान बना सकता है।
डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
यदि आप कोई ऐसा ट्रैफिक अपराध करते हैं, जिसके लिए कानून ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करने या उसे अयोग्यता की कार्रवाई के लिए भेजने की अनुमति देता है, तो जरूरी नहीं कि अधिकारी आपका प्लास्टिक वाला लाइसेंस ही अपने पास रखे। MoRTH के दिशा-निर्देशों के अनुसार, संबंधित कागजातों को जब्त करने की कार्रवाई e-Challan सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज की जा सकती है।
- चरण 1: सबसे पहले अधिकारी संबंधित ट्रैफिक अपराध और आपके वाहन या ड्राइविंग लाइसेंस की जानकारी दर्ज करता है।
- चरण 2: यदि संबंधित अपराध में कागजात जब्त करने की अनुमति है, तो अधिकृत अधिकारी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई शुरू करता है।
- चरण 3: कागजात जब्त किए जाने से संबंधित जानकारी e-Challan सिस्टम में दर्ज की जा सकती है। इसके बाद संबंधित विवरण VAHAN या SARATHI डेटाबेस में भी दिखाई दे सकते हैं।
- चरण 4: अपराध और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर मामला लाइसेंसिंग अथॉरिटी के पास भेजा जा सकता है। वहां ड्राइविंग लाइसेंस को अयोग्य घोषित करने या रद्द करने से संबंधित आगे की प्रक्रिया हो सकती है।
क्या कार में फिजिकल ड्राइविंग लाइसेंस और RC रखना जरूरी है?
केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 139 के तहत जिन कागजातों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में मान्य तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है, उनकी फिजिकल कॉपी साथ रखना सामान्य रूप से अनिवार्य नहीं है। इसके बावजूद कुछ परिस्थितियों में फिजिकल कागजातों की बैकअप कॉपी रखना उपयोगी हो सकता है।
- यदि आप अक्सर ऐसे इलाकों में वाहन चलाते हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर रहता है।
- यदि आपका ड्राइविंग लाइसेंस या वाहन का रिकॉर्ड आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है।
- यदि आपने हाल ही में वाहन के कागजात अपडेट कराए हैं और उनकी जानकारी अभी डेटाबेस में दिखाई नहीं दे रही है।
- यदि आपका मोबाइल फोन बंद हो जाए, बैटरी खत्म हो जाए या ऐप काम करना बंद कर दे।
DigiLocker या mParivahan स्वीकार नहीं करने पर क्या करें?
अगर आप ट्रैफिक पुलिस को आधिकारिक डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस दिखाते हैं और इसके बावजूद अधिकारी फिजिकल कॉपी मांगता है, तो आपको शांत रहकर कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए।
- DigiLocker के Issued Documents या mParivahan में उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड दिखाएं।
- अधिकारी को दस्तावेज सत्यापित करने दें।
- जरूरत पड़ने पर केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 139 का विनम्रता से उल्लेख करें।
- दस्तावेज स्वीकार नहीं करने का कारण पूछें और जांच में सहयोग करें।
- गलत चालान होने की स्थिति में उसका विवरण और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखकर संबंधित ट्रैफिक पुलिस शिकायत माध्यम या e-Challan पोर्टल पर शिकायत करें।
कुल मिलाकर, कार या बाइक चलाते समय हर वक्त फिजिकल कागजातों का पूरा सेट साथ रखना सामान्य रूप से जरूरी नहीं है। केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 139 के तहत ड्राइविंग लाइसेंस, RC, इंश्योरेंस और अन्य संबंधित कागजात DigiLocker तथा mParivahan जैसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि कागजात आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हों, उनकी जानकारी अपडेटेड हो और जरूरत पड़ने पर उनका सत्यापन किया जा सके। सामान्य स्क्रीनशॉट या पुराना स्कैन आधिकारिक डिजिटल कागजात के बराबर नहीं है। साथ ही, डिजिटल कागजात होने से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर होने वाली कानूनी कार्रवाई से छूट नहीं मिलती।