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    क्या पत्नी के साथ एक ही थाली में खाते हैं खाना, जानिए क्या कहते हैं खाने के नियम-कायदे

    Updated: Thu, 22 May 2025 06:48 PM (IST)

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार एक ही थाली में पति-पत्नी का भोजन करना दरिद्रता का कारण बन सकता है और पति की आयु घटा सकता है। विष्णु स्मृति और चरक स्मृति के अनुसार थूक या बाल गिरे भोजन को नहीं खाना चाहिए। कुत्ते के स्पर्श या दृष्टि से भी भोजन अपवित्र हो जाता है। इन नियमों का पालन करके घर में समृद्धि और स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है।

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    इस तरह का खाना खाने पर घर में दरिद्रता आती है, बीमारियां घेर लेती हैं।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आपने कई बार देखा होगा कि प्यार जताने के लिए अक्सर दोस्त एक ही थाली में खाने लगते हैं। या शादी के बाद पति-पत्नी भी एक ही थाली में साथ में खाने लगते हैं। मगर, विष्णु स्मृति और चरक स्मृति जैसी धार्मिक किताबों के अनुसार, ऐसा करना ठीक नहीं है। इससे घर में दरिद्रता आने लगती है। 

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    पति के खाना खाने के बाद पत्नी उसकी थाली में अलग से खाना परोसकर तो खा सकती है। ऐसा करने से घर में समृद्धि बढ़ती है। मगर, पति-पत्नी दोनों को एक साथ एक ही थाली में खाना खाने से परहेज करना चाहिए। एक ही थाली में साथ में खाना खाने से पति की उम्र घटती है और दरिद्रता का वास भी होता है। 

    यदि ऐसा हो, तो न खाएं खाना

    विष्णु स्मृति और चरक स्मृति में खाना खाने को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं। इन धार्मिक पुस्तकों के अनुसार, जिस खाने में थूक का छींटा गिर गया हो, जिस खाने में बाल गिर गया हो, जिस खाने को कुत्ते ने देख लिया हो, उस खाने को नहीं खाना चाहिए। 

    खाने में थूक गिरने से वह अशुद्ध हो जाता है। ऐसा खाना न तो खुद खाना चाहिए और न ही किसी दूसरे को देना चाहिए। विज्ञान के नजरिये से देखें, तो थूक में कई तरह के बैक्टीरिया होते हैं, जो खाने को अनहाइजीनिक बना देते हैं और उसे खाने वाला बीमार भी हो सकता है। 

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    खाने में बाल निकलना शुभ नहीं

    इसी तरह से खाने में बाल निकलने को भी शुभ शकुन नहीं माना जाता है। अगर, किसी व्यक्ति के खाने में अक्सर बाल निकल रहे हैं, तो यह संकेत है कि उस पर पितृ दोष है। ऐसे में उस खाने को नहीं खाना चाहिए। अन्यथा, राहु-केतु से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। 

    आपने अक्सर लोगों को देखा होगा कि उन्होंने अपने घर में कुत्ता पाला हुआ है। वो अपने खाने के दौरान उसे भी कौर तोड़-तोड़कर देते हैं, जो पूरी तरह से गलत है। आप अपने पालतू से चाहें जितना प्यार करें, लेकिन खाने को उसके सामने या उसके साथ बैठकर नहीं खाएं। 

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    सूत्र-ग्रंथों में श्वान को अपवित्र माना गया है। इस धारणा का एक कारण यह भी है कि वह मृत्यु के देवता यम से जुड़ा हुआ है। लिहाजा, इसके स्पर्श या दृष्टि डालने से ही माना जाता है कि वह भोजन अपवित्र हो गया है। 

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।