19 सितंबर से शुरू होगा महालक्ष्मी व्रत, ज्योतिषाचार्य से जानिए राशि अनुसार उपाय, दूर होगी आर्थिक तंगी
महालक्ष्मी व्रत 19 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक चलेगा, जो धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। ...और पढ़ें

कैसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न? (Picture Credits- AI Image)
HighLights
महालक्ष्मी व्रत 19 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा।
राशि के अनुसार उपाय करने से धन लाभ होता है।
व्रत के दौरान काले वस्त्र और तामसिक भोजन से बचें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महालक्ष्मी व्रत धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। यह एक अत्यंत फलदायी व्रत है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और धन लाभ के योग बनते हैं। साथ ही, घर की सुख-समृद्धि में भी वृद्धि होती है।
पंचांग के अनुसार, यह व्रत सोलह दिनों तक किया जाता है। इस व्रत की शुरुआत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है और इसका समापन आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि के दौरान राशि के अनुसार उपाय करने से साधक की किस्मत चमकती है और मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में आने वाले सभी दुख-दर्द दूर होते हैं। आइए, एस्ट्रोपत्री के श्री चंद्रेश शर्मा जी से जानते हैं कि महालक्ष्मी व्रत में राशि के अनुसार कौन-से उपाय करने चाहिए।
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से शुरू होने वाला 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत धन और ऐश्वर्य की वृद्धि के लिए विशेष माना जाता है। ज्योतिष में राशियों के चार तत्त्वों के अनुसार उपाय करने से शीघ्र फल प्राप्त होता है।
राशियों के तत्त्वों के अनुसार महालक्ष्मी व्रत के उपाय
अग्नि व पृथ्वी राशियां (मेष, सिंह, धनु, वृषभ, कन्या और मकर): इन राशि के जातकों को मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
वायु राशियां (मिथुन, तुला, कुंभ): इन राशि के लोगों को पूजा के दौरान सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए तथा मां लक्ष्मी को कौड़ियां व कमल का फूल अर्पित करना चाहिए।
जल राशियां (कर्क, वृश्चिक, मीन): इन राशि के जातकों को दूध से बनी खीर का भोग लगाकर 16 कन्याओं में बांटना चाहिए। इससे घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
कब से तक है महालक्ष्मी व्रत 2026
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत- 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का समापन- 19 सितंबर को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 19 सितंबर से होगी। वहीं, इसका समापन 3 अक्टूबर को होगा।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
महालक्ष्मी व्रत के दौरान भूलकर भी काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
इस दौरान किसी से वाद-विवाद करने से बचें।
मन में किसी के प्रति गलत विचार न लाएं।
घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
व्रत के दौरान तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
