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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 07, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सं. 36 घंटे में 13 शिशुओं की मौत

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Published: Sat, 07 Jun 2014 06:31 PM (IST)

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फोटो= वाइस प्रिंसिपल ने किया खुलासा : मरने वाले अधिकतर बच्चे लीची बागान इलाकों के निवासी

संवाद सूत्र, मालदा : पिछले 36 घंटों में मालदा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में 13 नवजात बच्चों की मौत हो गई। इन बच्चों की उम्र एक एक दिन से लेकर तीन वर्ष के बीच है। अधिकतर बच्चे मालदा जिले के वैष्णवनगर व इंग्लिशबाजार थाना क्षेत्र के निवासी हैं। इन बच्चों को सांस की तकलीफ, बुखार व उल्टी की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इधर, नवजात की मौत की घटना को लेकर परिवार के लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने शिकायत से इनकार किया है। मालदा मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डा. एमए रशीद ने बताया कि अस्पताल के चाइल्ड वार्ड का ढांचा काफी बेहतर है। यहां बेडों की संख्या भी पर्याप्त है। इलाज में लापरवाही की शिकायत बेबुनियाद है। डा. एमए रशीद मौत से संबंधित चौंकाने वाले तथ्य का खुलासा किया है। उनके मुताबिक जिन बच्चों की मौत हुई हैं वे उन क्षेत्रों में रहते हैं जहां काफी संख्या में लीची के पेड़ हैं। इस समय लीची पकते हैं और यहां से एक ऐसा विषाणु फैलता है जो नवजात बच्चों और उसकी मां को अपने चपेट में ले लेता है। वयस्कों पर इस वाइरस का कोई प्रभाव नहीं दिखता है, लेकिन नवजात बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ता है। ये बच्चे इस वाइरस से इतने बीमार हो रहे हैं कि उन्हें बचाना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि वाइरस की पहचान नहीं की जा सकी है पर पूरी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई है। डा. रशीद ने बताया कि ठीक एक वर्ष पहले भी इसी समय बच्चों को इन्हीं शिकायतों पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इन बच्चों ने दम तोड़ दिए। सालभर बाद फिर नवजात की मौत की घटना के बाद से यह सनसनीखेज तथ्यों का खुलासा स्वास्थ्य विभाग ने किया है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने प्रारंभिक तौर पर इस बीमारी को लीची सिंड्रोम का नाम दिया है। वाइस प्रिंसिपल ने स्वीकारा है कि यदि इसी तरह बीमारियां फैलती हैं तो यह महामारी का रूप ले सकता है। उल्लेखनीय है कि पिछले कई वर्षो से मालदा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का नाम बार-बार नवजात की मौत की घटनाओं को लेकर अखबारों की सुर्खियों में आ रहा है। पिछले दो वर्षो में मालदा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में करीब 2 सौ बच्चों की मौत हो चुकी है। इस बीच स्थिति से निपटने के लिए चाइल्ड वार्ड में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाई गई है। वार्ड में वार्मर लगाये गए हैं। इनटेनसिव केयर यूनिट व सिक न्यू बर्न केयर यूनिट चालू हुआ है, लेकिन जिले के चिकित्सकों का मानना है कि इस नये वाइरस से स्थिति और बिगड़ सकती है। मालदा जिले के 15 प्रखंडों में 11 प्रखंडों में करीब 27 हजार हेक्टेयर बागान में आम व तीन प्रखंडों के करीब पांच हजार हेक्टेयर बागान में लीची की खेती होती है। यदि लीची बागान से यह वाइरस फैल रहा है तो स्थिति और भयंकर हो सकती है। इससे मुकाबला करने के लिए जिले में स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिला रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन व राज्य के खाद्य प्रसंस्करण उद्यानपालन मंत्री कृष्णेन्दु नारायण चौधरी ने बताया कि वर्तमान में मेडिकल काफी उन्नत है, इसका एक समाधान निकाल लिया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य विभाग की नजर में इस मुद्दे को लाया गया है।