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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 26, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हाईकोर्ट के आदेश पर दिया सैन्य छावनी का आधा किराया

By Preeti jhaEdited By:
Published: Wed, 26 Jul 2017 12:08 PM (IST)

सेना के हलफनामे के अनुसार वर्ष 1976 से उत्तरी सिक्किम के भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में 860.47 एकड़ जमीन छावनी बनाने के लिए किराये पर ली गई थी।

हाईकोर्ट के आदेश पर दिया सैन्य छावनी का आधा किराया
हाईकोर्ट के आदेश पर दिया सैन्य छावनी का आधा किराया

गंगटोक, [जागरण संवाददाता] । भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में निजी जमीनों पर बनी सैनिक छावनियों का बकाया किराया भूस्वामियों को देने का आदेश सिक्किम हाईकोर्ट ने दिया था। भुगतान न होने पर हाईकोर्ट में दायर अवमानना पर सेना के उच्चाधिकारी को नोटिस जारी किया तो आधे किराये का भुगतान कर दिया गया। 

भारत-चीन के सीमावर्ती क्षेत्र ल्हाचुंग, ल्हाचेन व चुंगथांग में सेना को छावनी बनाने के लिए स्थानीय लोगों ने जमीनें किराये पर दी थीं। हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर भूस्वामियों को छावनी के किराये का पूर्ण भुगतान किए जाने का वर्ष 2014 में आदेश पारित किया गया था। आदेश के तीन साल बाद भी भूस्वामियों को किराया नहीं मिला तो उन्होंने हाईकोर्ट में पुन: अवमानना का वाद दायर किया।

इस पर उच्च न्यायालय ने कोलकाता स्थित इस्टर्न कमांड के डायरेक्टरेट आफ डिफेंस इस्टेट के प्रधान निदेशक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा। सेना के सिलीगुड़ी सेक्टर डिफेंस इस्टेट अफसर दीपक मोहन ने उच्च न्यायालय में हलफनामा देकर बताया कि चालू वर्ष के जनवरी माह में जमीन के बकाये किराये का आधा भुगतान किया जा चुका है।

हलफनामे में बताया गया कि उत्तरी सिक्किम के जिलाधिकारी के खाते में बतौर आधे किराया 1.92 करोड़ रुपये हस्तांतरित कर दिया गया है। सेना के हलफनामे के अनुसार वर्ष 1976 से उत्तरी सिक्किम के भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में 860.47 एकड़ जमीन छावनी बनाने के लिए किराये पर ली गई थी।