यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 16, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ग्रामीणों को फिर नए आशियाने की तलाश

संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग: लगातार हो रही तेज बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का पानी नदी किनारे रह रहे लोगों की देहरी तक पहुंच गया है। गत रात्रि को नदी में बढे़ पानी से डेढ़ सौ परिवार घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।
मंगलवार की तेज बारिश ने नदी किनारे रह रहे लोगों को खौफजदा कर दिया है। आपदा के बाद नदी का तल काफी ऊंचा होने से खतरा काफी बढ़ गया है। सबसे ज्यादा नदी किनारे कसबों में देखने को मिल रहा है। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड पर स्थित खाट में विगत पांच माह बंद पड़ा स्लाइडिंग जोन मंगलवार को एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। गत रात्रि को हुई तेज बारिश के कारण इस स्लाइडिंग जोन से भारी मात्रा में पत्थर व मलबा गिरने का सिलसिला शुरू हो गया है। यहां पर बने खतरे का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। गांव से कुछ दूरी पर इस भूस्खलन वाले इलाके से मात्र सौ मीटर रह गई है। गांव व इस खतरे के बीच अब खेत ही बचे है। इसके अलावा गांव गांव के 45 परिवार घर छोड़ने को तैयार बैठे हैं।
वहीं, मंदाकिनी नदी किनारे बसे लोगों की भी परेशानियां बढ़ती जा रही है। मंदाकिनी नदी के ऊफान पर आ जाने से कई स्थान पर नदी ने कटाव शुरू कर दिया है। इससे सुमाडी, गंगानगर व जवाहनगर, सेमी, चंद्रापुरी व सेमी के डेढ़ सौ परिवारों ने अब तक अपना घर छोड़ दिया है। सेमी गांव पर दो तरफा मार पड़ रही है। एक तो गांव के ऊपर से पत्थर गिर रहे है, जबकि गांव के नीचे से नदी के कटाव से खतरा बना हुआ है। कालीमठ में सरस्वती नदी से दलित बस्ती को खतरा पैदा हो गया है। रात होते ही ग्रामीण सुरक्षित स्थान पर जा रहे है। विजयनगर में लगभग 250 व अगस्त्यमुनि में लगभग 10 परिवार नदी किनारे रह रहे है।
