यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आरोग्य और स्वच्छता की देवी है मां शीतला
हरिद्वार के कनखल स्थित शीतला माता मंदिर में श्रद्धालु संतान की आरोग्यता और दीर्घायु के लिए मां की पूजा-अर्चना करते हैं।

हरिद्वार, [जेएनएन]: सनातन धर्म में आदि शक्ति को मातृ स्वरूप मानकर उनकी अनेक रूपों में पूजा की जाती है। इन्हीं में एक हैं भगवती शीतला माता जिन्हें आरोग्य और स्वच्छता की देवी माना जाता है। कनखल स्थित शीतला माता मंदिर में श्रद्धालु संतान की आरोग्यता और दीर्घायु के लिए मां की पूजा-अर्चना करते हैं।
इतिहास
हरिद्वार में दक्षनगरी कनखल स्थित शीतला देवी को राजा दक्ष की कुल देवी के रूप में भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी जगह पर राजा दक्ष ने अपनी कुल देवी शीतला देवी की कठोर तपस्या की थी। इस पर मां प्रसन्न हुई और राजा दक्ष की मनोकामना पूरी हुई व इसी स्थान पर सती माता ने जन्म लिया।
सत युगीन इस मान्यता के आधार पर इस स्थान पर लोग शीतला माता की पूजा करते आ रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में पूजा-अर्चना करने से शीतला माता की अनुकंपा से लोग रोग मुक्त हो जाते हैं। वैसे तो साल भर श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करते हैं लेकिन शीतला अष्टमी पर माताएं संतान की आरोग्यता के लिए बड़ी संख्या में मंदिर में शीतला माता का पूजन करते हैं।
महात्म्य
साल के दोनों नवरात्र में यहां पूजा-अर्चना को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नवरात्र में यहां हर रोज 56 प्रकार के भोग लगाए जाते हैं। हर रोज पंचामृत से माता का अभिषेक कर पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर में माता का पूजन करने से मन वांछित फल की प्राप्ति हो जाती है। खासतौर पर लोग यहां संतान के आरोग्य को माता की पूजा करते हैं।
कैसे पहुंचे
हरिद्वार देश के सभी प्रमुख शहरों से रेल व बस सेवा से जुड़ा हुआ है। यहां पहुंचकर श्रद्धालु निजी वाहन से अथवा टेंपो से भी कनखल में दक्ष रोड पर स्थित शीतला माता मंदिर पहुंच सकते हैं। रेलवे स्टेशन और बस अड्डे से मंदिर की दूरी करीब चार किलोमीटर है।
मां शीतला को प्रतिदिन 56 प्रकार के प्रसाद का भोग लगाया जाता
मां शीतला माता मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विनोद गहतोड़ी का कहना है कि नवरात्र के दौरान मंदिर में मां शीतला को प्रतिदिन 56 प्रकार के प्रसाद का भोग लगाया जाता है। साथ ही प्रतिदिन कन्याओं का पूजन कर उन्हें वस्त्र, दक्षिणा आदि प्रदान की जाती है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भंडारे व रहने का भी प्रबंध मंदिर समिति की ओर से किया जाता है।
