यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 19, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
शिवलिंगों के इतिहास से कराया रूबरू
वाराणसी : हिमालय, शिवलिंग, वेद-पुराण और धर्म-इतिहास की विद्या, गाथा सब कुछ बताया, वह भी पावर प्रेजें

वाराणसी : हिमालय, शिवलिंग, वेद-पुराण और धर्म-इतिहास की विद्या, गाथा सब कुछ बताया, वह भी पावर प्रेजेंटेशन से। इसे देख लोग आश्चर्यचकित भी हुए और प्रकृति के बारे में खूब सारी जानकारियां भी जुटाईं।
बीएचयू विज्ञान संस्थान के संगोष्ठी संकुल में मंगलवार को आयोजित 'हालोड जियोलाजिकल मार्बल्स दैट यूनिफाइड द पीपुल आफ प्री हिस्टोरिक इंडिया' विषय पर पद्मभूषण प्रो. केएस वाल्दिया ने व्याख्यान दिया।
जवाहर लाल नेहरू सेंटर फार एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च बेंगलुरु के जियोडायनामिक्स यूनिट के मानद प्रो. वाल्दिया ने कहा कि प्राचीन परंपराएं आज की नवीनतम परंपराओं से मेल बना रही हैं। परंपराएं एक-दूसरे की पूरक के तौर पर काम कर रही हैं। प्राचीन समय में लोग शिवलिंग और ज्योर्तिलिंग के दर्शन को काफी शुभ और लाभकारी मानते थे। वह परिपाटी आज भी समाज में चली आ रही है। उन्होंने देश के कोने-कोने के शिवलिंगों की पावर प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने ऐसे कार्यक्रमों की सराहना की और कहा कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों पर जोर होगा। सजीव दर्शन से तरह-तरह की भ्रांतियां भी दूर हो जाती हैं। संचालन भौतिकी विभाग के प्रो. मल्लिकार्जुन जोशी व स्वागत विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. बच्चा सिंह ने किया।
