यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 22, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सरकारी आंकड़ों में केवल 43 ही डेंगू पीड़ित

चौकसी का हाल : बीएचयू में एक ही मरीज का इलाज, डीडीयू शून्य
वाराणसी : डेंगू का प्रकोप और रोजाना सरकारी अस्पतालों में ही आधा दर्जन तक मरीज पहुंच रहे हैं। निजी चिकित्सालय भी रोगियों से पटे पड़े हैं। इसके बाद भी सरकारी आंकड़ों में केवल 43 ही पीड़ित दर्ज हो सके। इसमें भी 22 दूसरे जिलों के हैं। इनमें मंडलीय अस्पताल के अलावा महज दो ही निजी अस्पतालों की सूचना शामिल है। बीएचयू में केवल एक ही मरीज भर्ती हुआ।
वहीं केवल बीएचयू अस्पताल, मंडलीय अस्पताल और पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के रिकार्ड में 180 मरीज दर्ज हैं। इसमें केवल दीनदयाल अस्पताल में ही सात पुष्ट हो चुके हैं। निजी चिकित्सालयों के आंकड़े भी जोड़ लें तो संख्या दोगुने से कम न होगी। ऐसे में डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यह स्थिति तब है जबकि हर माह यही आंकड़े शासन को जाते हैं। इस आधार पर ही चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।
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वास्तविकता, डीडीयू में 18 पुष्ट
विभाग के आंकड़ों के इतर दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल (डीडीयू हास्पिटल) में ही अब तक 47 मरीज आए। सीएमएस डा. मंगला सिंह के अनुसार इसमें 35 भर्ती किए गए और 18 पाजिटिव पाए गए। बीएचयू में कराई गई जांच में सात मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई। अन्य 11 की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
मंडलीय अस्पताल : 25 दिन, 53 भर्ती
मंडलीय अस्पताल की आपात चिकित्सा इकाई की रिपोर्ट के अनुसार 26 अगस्त से अब तक 53 डेंगू पीड़ितों का इलाज किया जा चुका है। एक डेंगू पीड़ित की मौत भी हो चुकी है। यहां शनिवार को ही तीन डेंगू पीड़ित भर्ती किए गए। इसमें राजघाट के धीरज (33), सिगरा की लालमनी (40), बिहार के साकेत (25) शामिल हैं। इसके डेंगू वार्ड पूरी तरह भर गए हैं। नए मरीजों के लिए तीन अतिरिक्त बेड लगाने पड़े हैं।
बीएचयू में 80 पाजिटिव
बीएचयू अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार यहां एनएस-1 एजी रिपोर्ट में 80 लोगों की जांच में डेंगू पाजिटिव पाया गया। एक की मौत हो गई और डेंगू शॉक सिंड्रोम के 20 मरीज भर्ती किए गए। इसमें भी 16 की हालत गंभीर होने पर एक्यूट केयर यूनिट (एसीयू) में इलाज करना पड़ा।
कौन एकत्र कर रहा सूचनाएं!
स्वास्थ्य विभाग में डेंगू पीड़ितों की सूचना एकत्र करने की जिम्मेदारी किसकी, इसे लेकर ही भ्रम की स्थिति है। सीएमओ डॉ. एमपी चौरसिया ने संक्रामक रोग नियंत्रण प्रकोष्ठ के अधिकारी का नाम बताया। उन्होंने नगरीय मलेरिया इकाई के अधिकारी डा. पुनीत का नाम सुझाया। इन्होंने जो बताया-'केवल मंडलीय अस्पताल और दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय के आंकड़े एकत्र का जिम्मा है। सूचनाएं एक घंटे बाद मिलेंगी। एक घंटे बाद नाट रिचेबल।' शेष क्षेत्रों का सूचना संग्रह जिला मलेरिया अधिकारी के जिम्मे। जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार मंडलीय अस्पताल, एपेक्स हास्पिटल और लक्ष्मी मेडिकल में 43 डेंगू केस की सूचना है। बीएचयू से एक मरीज की सूचना आई है।
खतरे की घंटी
कसी भी मोहल्ले में डेंगू संक्रमित रोगी मिलते ही संबंधित क्षेत्र में लार्वा रोधी कार्य कराने होते हैं ताकि अन्य लोग इसकी चपेट में न आएं। आंकड़े दुरुस्त न होने से लार्वा रोधी कार्य का हाल समझा जा सकता है।
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