यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 14, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कोल्ड डायरिया से एक बच्चे की मौत, छह भर्ती
उन्नाव, जागरण संवाददाता : बरसात के साथ ही ठंड का कहर बढ़ गया है। शीतलहर के चलते बढ़ी गलन ने रोगियों

उन्नाव, जागरण संवाददाता : बरसात के साथ ही ठंड का कहर बढ़ गया है। शीतलहर के चलते बढ़ी गलन ने रोगियों की संख्या भी बढ़ा दी है। ठंड लगने से बीमार रोगियों की अस्पताल में लगातार संख्या भी बढ़ रही है। कोल्ड डायरिया तो घर-घर दस्तक दे रही है। सभी आयु वर्ग के लोग इसका शिकार को हो रहे हैं। औसतन कोल्ड डायरिया के 12 से 15 रोगी जिला अस्पताल में प्रतिदिन भर्ती किए जा रहे हैं। ओपीडी में सीजन बीमारियों से पीड़ित होकर आने वाले रोगियों की संख्या तो सैकड़ों में है। रविवार को जिला अस्पताल में बुखार और कोल्ड डायरिया से पीड़ित 11 रोगी भर्ती किए गए इनमें से एक तीन वर्षीय बालक की मौत हो गई जबकि छह बच्चों की हालत गंभीर है।
तीन दिनों से लगातार ठंड के साथ ही रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। 72 घंटे के अंदर जिला अस्पताल में बुखार और कोल्ड डायरिया के 39 रोगी भर्ती कराए गए हैं। रविवार को कोल्ड डायरिया से पीड़ित जिन रोगियों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया उनमें लवकुश 3 वर्ष पुत्र रामकिशोर निवासी हरिनामखेड़ा हसनगंज, हिमांशी 5 वर्ष पुत्री देशराज बरुआ बीघापुर, मनस्सा 1 वर्ष पुत्री इरशाद तालिब सरांय, पियूष 10 माह पुत्र विजय आदर्शनगर, शिवम 2 वर्ष पुत्र केशन लक्ष्मणखेड़ा, सत्यम डेढ़ वर्ष पुत्र संजू हरौनी तथा तन्नू 1 वर्ष पुत्री अर¨वद दोस्ती नगर बच्चे शामिल हैं। कोल्ड डायरिया पीड़ित बच्चों में लवकुश 3 वर्ष को रविवार सुबह ही जिला अस्पताल लाया गया था जहां दो घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई। अभी 12 से अधिक कोल्ड डायरिया और बुखार पीड़ित रोगियों का उपचार चल रहा है। ठंड की ही तरह कोल्ड डायरिया और बुखार के रोगियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
ठिठुर रहे रोगी और तीमारदार
गंभीर बीमार रोगियों को अस्पताल प्रशासन की अनदेखी के चलते ठंड से दो चार होना पड़ रहा है। अस्पताल के वार्डो में ठंड से बचाव का कोई प्रबंध नहीं हैं। कुछ खिड़कियों के तो पल्ले भी बंद नहीं होते इससे सर्द हवाओं के झोकों का रोगियों को सामना करना पड़ता है। उधर रोगियों के साथ ही तीमारदारों भी ठंड का शिकार हो बीमार हो रहे हैं। इस सबके बाद भी अभी तक अस्पताल प्रशासन ने रोगियों को ठंड से बचाने की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया है।
