यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 28, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
एक सप्ताह में चार की मौत से दहशत में रेणुकापार के लोग
जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र) : चोपन ब्लाक के रेणुकापार वाले क्षेत्र के कालापानी के रूप म

जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र) : चोपन ब्लाक के रेणुकापार वाले क्षेत्र के कालापानी के रूप में जानते हैं। इस इलाके में स्थित पनारी ग्राम पंचायत में गत एक सप्ताह के भीतर चार लोगों की मौत हो चुकी है। इस मौत से लोगों में दहशत है। हर कोई बस यही पता करने में जुटा है कि आखिर ऐसी कौन सी बीमारी है जो हंसते-खेलते परिवार में गम पैदा कर दिया। इन मौतों ने कई सवाल भी खड़ा किये हैं। वहीं क्षेत्र में समुचित उपचार की व्यवस्था न होने से ग्रामीण परेशान हैं।
पनारी ग्राम पंचायत के विभिन्न टोलों में इन चार आकस्मिक मौतों में मृतकों की हालत सामान्य बताई जा रही थी। कई मौत में तो हृदय गति रुकने से मौत बताई जा रही है। जो आमतौर में इन क्षेत्रों में होने वाली मौत के कारण नही होते हैं। इन मौतों में करमसार के रामदेव (44) पुत्र तेजबली, बब्बन गौड़ (52) निवासी कररी, भोडार के देव बैगा (42) तथा खाड़र के राजाराम की मौत आकस्मिक तौर पर हुई। अब इन मौतों को लेकर ग्रामीण भयभीत हैं और किसी रहस्यमय बीमारी की बात भी कह रहे हैं। यहीं नहीं, पिछले कुछ वर्षों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीज भी सामने आने से ग्रामीणों के माथे पर ¨चता दिख रही है।
मेडिकल अटोप्सी होनी चाहिए
पनारी ग्राम पंचायत में हुई मौत के संबंध में ओबरा परियोजना के पूर्व चिकित्सक डा. आरके गुप्ता ने बताया कि अगर ये मौतें आकस्मिक होने के साथ कोई लक्षण नहीं सामने आ रहे हैं तो इनकी मेडिकल अटोप्सी होनी चाहिए थी। जिसकी सुविधा फिलहाल हमारे जनपद में नहीं है। बताया कि कई संक्रामक बुखार ऐसे हैं जिनका हृदय पर असर पड़ता है। ऐसे कई बुखार हैं जो मच्छरों के काटने से होता है। जिसमें हृदय को अघात पहुंचता है। बताया कि ग्रामीण अंचलों में भी खानपान पर शहरों का प्रभाव बढ़ रहा है। रसोई की समृद्धि के नाम पर लोग प्राकृतिक चीजों से दूर जा रहे हैं। बताया कि रिफाइंड तेल के भी नकारात्मक प्रभाव तेजी से अब सामने आ रहे हैं।
