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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 21, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अज्ञात बीमारी से 12 बच्चों की मौत

By JagranEdited By:
Published: Tue, 21 Nov 2017 10:37 AM (IST)

जागरण संवाददाता, आसनडीह (सोनभद्र) : गांव के एक टोले में सप्ताहभर के भीतर 12 बच्चों की जान

अज्ञात बीमारी से 12 बच्चों की मौत
अज्ञात बीमारी से 12 बच्चों की मौत

जागरण संवाददाता, आसनडीह (सोनभद्र) : गांव के एक टोले में सप्ताहभर के भीतर 12 बच्चों की जान चली गई और स्थानीय स्वास्थ्य महकमा अंजान बना हुआ है। यही नहीं स्थानीय पंचायतें इतनी बड़ी घटनाओं के बारे में चू तक नहीं करती। यहां तक की इस बड़ी घटना के बारे में ग्राम प्रधान तक ने भी सूचना देने की जहमत नहीं उठाई।

क्षेत्र के डुमरहर गांव का नेटियान टोला के अधिकांश घरों से अर्थियां निकल चुकी हैं। वह भी मात्र एक सप्ताह के भीतर। इस भीषण चित्कार की आवाज न ग्राम प्रधान सुन पाया और न ही स्थानीय स्वास्थ्य विभाग। बिगड़ते हालात की जानकारी सोमवार को उस वक्त हुई जब टोला निवासी हसनैन के दो संतानों इन्तजार (9) व शाहिदा खातून (7) की मौत की बात रिश्तेदारों ने बताया। उसके बाद तो पिछले एक सप्ताह में अर्थियां उठने का तांता लगने की खबरें मिलने लगीं।

इसके पूर्व गांव के बजरंगी (11) पुत्र संतोषी, चांदनी (11), निरजा (9) पुत्र उदय चंद, गुड्डी पुत्री राजपाल, सीता (11) पुत्री अज्ञात, सकुल (50) पुत्र रामअवतार, मानकुवर (6) पुत्र शिवा, मोनी (8) सुखदेव, सुनीता (8) पुत्री प्रेमलाल, अखिलेश (7) पुत्र शिवचरन अब तक मौत के गाल में समा चुके हैं। वर्तमान हालात यह है कि अब तक बुखार से मरने वालों में अब भी बभनी के नेटियान टोला व पूर्वी टोला में लोग बिस्तर पर पड़ हुए हैं।

इसके पहले भी हो चुकी है मौत

पखवाड़े भर पहले भी बभनी के जौराही, खोतोमहुआ, सेवड़ी ,सतबहनी गावों में भी बुखार से 13 ने दम तोड़ दिया था। उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग मौतों पर गम्भीर नहीं हुआ। इसके बारे में बभनी सीएचसी प्रभारी डा. वरुणा निधि ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। टीम भेजकर पता करवाता हूं। अगर लोग बीमार हैं तो उपचार किया जाएगा।

मौत के पीछे का राज क्या है

गांवों में लोग मर रहे हैं और विभागों के अधिकारी मजा काट रहे हैं। गांव के हालात कैसे हैं। इसकी जानकारी लेना तक मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। इसकी बानगी है कि एक सप्ताह के भीतर 12 बच्चों की मौत होती है और किसी को सूचना तक प्राप्त नहीं हो पाती। यहां तक की गांव का प्रथम नागरिक ग्राम प्रधान लीलावती तक ने भी इसकी जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। ग्रामीणों में अब भय है कि व्यवस्थाएं ऐसी ही रहीं तो गांव में मौत का तांडव होता रहेगा और जनप्रतिनिधि सहित अधिकारी मौत मारते रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग को जानकारी नहीं हो पाती। प्रश्न उठता है कि ग्राम पंचायत विकास अधिकारी तक ने भी इसकी जानकारी आगे नहीं दी।

क्या बोले अधिकारी

अभी जानकारी लेता हूं। इसकी जांच करायी जाएगी। दवाइयां शीघ्र ही गांव में भेजवाकर पीड़ितों को दिलाता हूं। हर कीमत पर व्यक्ति के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाएगा।

-डा. एसपी ¨सह, सीएमओ, सोनभद्र।