यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 22, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दिमागी बुखार से एक और महिला की मौत, 14 बीमार

श्रावस्ती : तराई में संक्रामक बीमारियां कुलांचे भर रही हैं। बीमारियों पर अंकुश पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनाया गया एक्शन प्लान फ्लाप साबित हो रहा है। इकौना के कल्यानपुर और पासीपुरवा में दिमागी बुखार से दो मौतों के बाद गिलौला के चेतिया मुरार में बुखार से रविवार की रात एक और महिला की मौत हो गई। बुखार से गांव तप रहा है। 14 से अधिक लोग पीड़ित चल रहे हैं। इस बीमारी से स्वास्थ्य विभाग अंजान है। ग्रामीण बताते हैं कि बुखार की सूचना संबंधित सीएचसी को दी गई है। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य टीम उपचार के लिए गांव में नहीं पहुंची है। पीड़ित लोग निजी चिकित्सकों या गांव में स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज कराने को विवश हो रहे हैं।
गिलौला ब्लॉक क्षेत्र के चेतिया मुरार गांव में सात दिनों से बुखार का कहर जारी है। इसकी चपेट में आकर धनदेई(32) पत्नी नाथू कई दिनों से पीड़ित चल रही थी। इलाज के लिए उसे बहराइच ले जाया गया। हालत में सुधार न होने पर उसे परिवारीजन रविवार को घर ले आए। रात में उसकी मौत हो गई। गांव में फैले बुखार की चपेट में कई लोग आ गए हैं। श्यामता (45), कमला (35), खरभन (48), पप्पू (22), राजू (23), सकटू (13), छोटके (15), सुरेश (15), कल्लू (20), ठगई (50), अलगू (45), चिंता (52), सरोज (24), बड़कऊ (16) बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। गांव के जगदेव व साधू बताते हैं कि गंदगी की वजह से बीमारी फैली हुई है। सात दिनों से गांव में बुखार फैला हुआ है। बीमारी की सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी गई लेकिन अभी तक कोई नहीं आया। मयंकर कहते हैं कि गांव से सटा सुअर बाड़ा भी बीमारी के प्रकोप को बढ़ा रहा है। गांव में गंदगी की भरमार है। नालियां बजबजा रही हैं। सीएमओ डॉ. आरपी गुप्ता का कहना है कि गांव में फैले बुखार के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। उपचार के लिए गांव में स्वास्थ्य टीम भेजी जा रही है।
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