यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 27, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
श्रावस्ती में भी मिले डेंगू के तीन मरीज

श्रावस्ती : तराई में दिमागी बुखार के साथ डेंगू का प्रकोप जारी है। जिले में डेंगू के तीन मरीज मिले हैं। डेंगू से प्रभावित मरीजों को बहराइच जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर लखनऊ रेफर कर दिया गया। परीक्षण के दौरान डेंगू की पुष्टि हुई है। एक की हालत में सुधार है जबकि दो की हालत गंभीर बताई जाती है।
मौसम के बदल रहे मिजाज के बीच तराई में संक्रामक बीमारियां कुलांचे भर रही हैं। डायरिया, दिमागी बुखार से जहां लोग दम तोड़ रहे हैं वहीं डेंगू के डंक से लोग सहमे हुए हैं। हरिहरपुर रानी ब्लॉक क्षेत्र के पांडेयपुरवा गांव निवासी डॉ. सहदेव प्रसाद मिश्र को बुखार से पीड़ित होने पर बहराइच जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने जब ब्लॅड टेस्ट करवाया तो जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है। इसी प्रकार जमुनहा ब्लॉक क्षेत्र के पटना मल्हीपुर निवासी दिनेश प्रताप सिंह पुत्र योगेंद्र सिंह व उनकी पत्नी सुनीता सिंह भी डेंगू की चपेट में आ गए हैं। इस दंपति का इलाज लखनऊ में चल रहा है।
डेंगू के लक्षण
श्रावस्ती : सीएमओ डॉ. आरपी गुप्ता का कहना है कि डेंगू विषाणुजनित रोग, एडिज, एजिप्टाई (टाइगर मच्छर) के काटने से फैलता है। ये मच्छर साफ एवं स्थिर पानी में पाया जाता है। डेंगू में सर्दी जुकाम के साथ तेज बुखार, शरीर एवं जोड़ों में दर्द,आंखों में सूजन आना तथा चौंध लगना, चेहरे/शरीर पर दानों का निकलना, उल्टी होना डेंगू के ये प्राथमिक लक्षण है। गंभीर लक्षण को हेमरिजिक अवस्था कहा जाता है। इसमें शरीर एवं त्वचा लाल हो जाता है। चकत्ते पड़ जाते हैं तथा नाक व मुंह से खून आने लगता है।
क्या करें
- मच्छरदानी एवं मच्छर रोधी क्वायल तथा मैट का नियमित प्रयोग करें।
- शरीर के खुले भाग को कपड़े से ढक
कर रखें।
-शरीर के खुले भाग पर मच्छर रोधी क्रीम का प्रयोग करें।
- घर के अंदर एकत्रित पानी को फेंक दिया करें, खिड़कियों में जाली लगवाएं।
- घरों के बाहर नालियों की सफाई नियमित करें।
- गडढों में मिट्टी का तेल एवं जला मोबिल ऑयल को छिड़क दिया करें।
- घरों के आसपास धुंआ किया जाना भी मच्छरों से बचाव का उपाय है।
क्या न करें
- मच्छरों के पैदावार को रोकने के लिए एक स्थान पर पानी जमा न होने दें।
- संभावित रोगी को सरकारी अस्पताल में ही इलाज कराएं।
-डेंगू के रोगी को खुले में न रखें, मच्छरदानी में रखें।
- बुखार उतारने के लिए पैरासीटामॉल तथा पानी की पट्टी के अलावा कुछ भी न दें।
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