विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 26, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बुखार ने दो बच्चों की और निगली ¨जदगी

By JagranEdited By:
Published: Sat, 26 Aug 2017 02:59 AM (IST)

संवाद सहयोगी, जलालाबाद: गांव मनोरथपुर सहसोबारी में गुरुवार की रात बुखार से दो और बच्चों क

बुखार ने दो बच्चों की और निगली ¨जदगी
बुखार ने दो बच्चों की और निगली ¨जदगी

संवाद सहयोगी, जलालाबाद: गांव मनोरथपुर सहसोबारी में गुरुवार की रात बुखार से दो और बच्चों की मौत हो गई। गांव में कुल मिलाकर एक दर्जन बच्चे मौत का शिकार हो चुके हैं। इतनी मौते होने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा संजीदा नहीं हुआ है। विभाग की लापरवाही लगातार उजागर हो रही है। कैंप लगाकर सिर्फ नीली-पीली गोलियां बांटकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। बच्चों की मौत से ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। हालात यह है कि न तो जिला प्रशासन इस पर संजीदा नहीं है। प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के अलावा अन्य किसी जन प्रतिनिधि गांव जाने की जहमत नहीं उठाई। आइएमए और पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद के नेतृत्व में प्राइवेट डॉक्टरों की एक टीम ने गांव का दौरा किया था।

------------------------

केस एक - गांव निवासी मिश्रीलाल की नौ माह की बेटी छाया पिछले 15 दिनों से बीमार चल रही थी। गांव में लगे कैंप से वह बच्ची की दवाई ले रहा था। एक बार वह नगरिया सीएचसी भी गया था। वहां डॉक्टर ने दवाई देकर उसे घर ले जाने को कहा था। इसके बाद वह गांव कैंप में मिलने वाली नीली-पीली गोलियां ही बच्ची को खिला रहा था। कैंप में मौजूद डॉक्टरों ने उसकी कोई जांच नहीं कराई थी। मिश्रीलाल की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह बच्ची को जिला अस्पताल तक नहीं ला पा रहा था। गुरुवार की रात उसकी अचानक हालत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत से उसके परिवार में मातम छा गया। मिश्रीलाल का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग ने उसकी बच्ची की जांच कराने के बाद उसका इलाज किया होता तो शायद उसकी जान बच जाती।

----------------------------

केस दो- गांव निवासी खुशीराम का तीन वर्षीय पुत्र रामलड़ैते बुखार फैलने के शुरूआती दौर से ही बुखार से पीड़ित था। उसे आठ अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां से उसे लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। यहां इलाज सही नहीं मिलने पर परिजन उसे वापस ले आए थे। इसके बाद उसे फर्रूखाबाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां से उसे कानपुर रेफर कर दिया गया था। दो दिन पहले ही परिजन उसे घर वापस ले आए थे। गुरुवार की रात रामलड़ैत ने भी दम तोड़ दिया। मृतक के परिजन उसकी मौत के लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि बेटे का सही से इलाज किया जाता तो उसकी जान बच जाती।

----------------------------------

यह बच्चे हो चुके हैं मौत का शिकार

1. ¨रक (3) पुत्री बलवीर

2. लक्ष्मी (3) पुत्री गुड्डू

3. नववर्ष (6) पुत्र हरिपाल

4. दिव्यांशी (3) पुत्री लालाराम

5. संध्या (1) पुत्री लालमन

6. सुभाषनी (3) पुत्री फूल ¨सह

7. अनीता (8) पुत्री राकेश

8. मालती (5) पुत्री हाकिम ¨सह

9. कन्यवती (5) पुत्री सनही ¨सह

10. बबलू(11 दिल) पुत्री राजेश

-------------------------------------

जिले में हो चुकीं और कई मौतें

जलालाबाद में ही मनोरथपुर सहसोबारी के पड़ोसी गांव हरेवा में 22 वर्षीय राम सागर पुत्र सत्यपाल, गांव जिगनेरा निवासी ब्रजपाल का आठ वर्षीय पुत्र नीतेश, गांव डहर निवासी सतीश की चार वर्षीय बेटी मुस्कान, कलान कस्बा अखिलेश गुप्ता की तीन वर्षीय बेटी अलखनंदा और सतरी गांव निवासी नन्हे का बेटा अर¨वद और कटरा क्षेत्र के गांव भोजपुर निवासी राजपाल की पांच वर्षीय बेटी आकांक्षा की बुखार से मौत हो गई थी।

-------------------------------------

टीके लगने से बच्चों में चढ़ रहा बुखार

ग्रामीणों मुताबिक बुखार फैलने के बाद बच्चों को डीपीटी का टीका लगाया गया, लेकिन इसे लगाने के बाद बच्चों में बुखार और बढ़ गया। गांव से कुल छह बच्चों को जांच के लिए लार का सैंपल लखनऊ लैब भेजा गया था। जिसमें चार बच्चों में डिप्थीरिया की की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा किसी भी बच्चे की जांच नहीं कराई गई।-----------------------------

ग्रामीणों से बातचीत ----

फोटो 25 एसएचसन - 17

- बच्चों के गले में सूजन आने के बाद उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो जाती है। जिससे उनकी मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कुछ ही बच्चों की जांच कराई। बाकी सबका इलाज बगैर जांच के चल रहा है।

- वीरपाल

फोटो 25 एसएचसन - 18

- बच्चों की मौत के पीछे सबसे बड़ा कारण बच्चों को सही से इलाज नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आ रही है। अगर स्वास्थ्य विभाग सचेत नहीं हुआ तो और बच्चे मौत को शिकार होंगे।

- सुरेंद्र पाल

फोटो 25 एसएचसन - 19

- बुखार के लक्ष्ण की जानकारी के बगैर बच्चों को नीली-पीली गोलियां बांटी जा रही है। जांच नहीं होने से बच्चों में कौन सी बीमारी है इसका पता नहीं लग पा रहा है। जिससे बच्चों की लगातार मौत हो रही है।

- राम प्रकाश

फोटो 25 एसएचसन - 20

- डॉक्टर कैंप लगाकर बच्चों को दवाई तो बांट रहे हैं, लेकिन बीमारी की वजह जानने की कोशिश नहीं कर रहे है। बच्चों की मौत से ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। बच्चों को बेहतर इलाज कराने की सुविधा की जाए।

- सिपाही लाल, ग्राम प्रधान

-----------------------------

बुखार की चपेट में आए पड़ोसी गांव

जलालाबाद क्षेत्र के गांव अफजालपुर, खालसा, चौहना, खटका, रूस्तमपुर, खंडहर, जिगनेरा, रामपुर वैन, शुक्ला मई, कटेही, सनारी आदि शामिल है इनमें दर्जनों बच्चे बुखार की चपेट में हैं।

-------------------------

बच्चों की मौतें नहीं रुकी तो होगा आंदोलन

ग्रामीणों की मुताबिक शासन और प्रशासन की कमी की वजह से लगातार बच्चों की मौतें हो रहीं हैं। एक दर्जन से अधिक बच्चों की मौत होने के बाद भी सरकार का इस ओर ध्यान नहीं जा रहा है। बच्चों को सिर्फ नीली-पीली गोलियां देकर इलाज किया जा रहा है। किसी भी बच्चे की जांच नहीं की जा रही है। अगर स्वास्थ्य विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। आंदोलन में शामिल होने वालों में गांव के प्रधान सिपाही लाल, वीरपाल, सुरेंद्र पाल, ओमकार, शिवशंकर, अनिल कुमार, राकेश, खंडूरी, विपिन, गुड्डू, अर¨वद आदि शामिल थे।

----------------------------

वर्जन -

गांव में लगाकर छिड़काव और फा¨गग कराई जा रही है। मलेरिया की दवाई और ओआरएस के पैकेट ग्रामीणों को वितरित किए जा रहे हैं। इसके अलावा फाइलेरिया की दवाई भी वितरित की जा रही है। दो टीमें लगातार गांव में स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है। जिन बच्चों के डिप्थीरिया के लक्ष्ण मिल रहे है उनकी जांच कराई जा रही है। अभी तक आठ बच्चों की जांच कराई गई, जिसमें चार बच्चों में डिप्थीरिया की पुष्टि हुई। यह बीमारी गंदगी से फैलती है। गांव की साफ-सफाई थी कराई जा रही है।

- आरपी रावत, सीएमओ