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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 20, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बुखार से बच्ची की मौत, चार जिला अस्पताल रेफर

By JagranEdited By:
Published: Sun, 20 Aug 2017 03:00 AM (IST)

संवाद सहयोगी, जलालाबाद : बुखार का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। गांवों के बाद अब नगर में भी

बुखार से बच्ची की मौत, चार जिला अस्पताल रेफर
बुखार से बच्ची की मौत, चार जिला अस्पताल रेफर

संवाद सहयोगी, जलालाबाद :

बुखार का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। गांवों के बाद अब नगर में भी बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं। दस वर्षीय बालिका की बुखार से मौत हो गई। चार बच्चों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। स्वास्थ्य विभाग रोकथाम कर पाने में नाकाम हो रहा है।

शाहजहांपुर रोड स्थित ग्राम विश्रामनगर निवासी ड्राइवर कुलविन्दर की दस वर्षीय पुत्री पूजा को शुक्रवार शाम तेज बुखार आया था। परिवार वाले सीएचसी ले गए। हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। बच्ची की मौत से परिवार में कोहराम मच गया।वह तीन बहनों में सबसे छोटी थी। कुल¨वदर प्राइवेट वाहन चलाता है। बेटी की मौत से आहत कुल¨वदर का कहना है कि अगर वह प्राइवेट अस्पताल लेकर जाता तो शायद उसकी बच्ची की जान बच जाती। गांव में कुलविन्दर की दूसरी बेटी शिवानी व पड़ोस में रहने वाले लालाराम की बेटी सपना भी बुखार की चपेट में हैं, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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बच्चो की मौत के बाद भी नहीं जाग रही संवेदना

बुखार से बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह संवेदनहीन हो चुका है। न तो रोकथाम के लिए कोई प्रयास किए जा रहे हैं और न ही दवाइयों का सही से विरतण कराया जा रहा है। सबसे ज्यादा दस बच्चों की मौत मनोरथपुर सहसोवारी गांव में हुई, लेकिन यहां पर कैंप में नीली पीली गोलियां हीं बांटी जा रही है। गांव के गुड्डू की बेटी लक्ष्मी की दो दिन पहले हुई मौत की घटना से ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं लक्ष्मी के पिता गुड्डू ने जिला अस्पताल के डाक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए एसडीएम सत्यप्रिय ¨सह से शिकायत की है।

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भड़क गए ग्रामीण

गांव में चार दिन से कैंप नहीं हो रहा था। लक्ष्मी की मौत के बाद शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, तो ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। उनकी डा. बिजेन्द्र, शशिकांत, एएनएम रजनी देवी व मयंक से तीखी नोकझोंक हुईं। ग्राम प्रधान सिपाही लाल के समझाने पर ग्रामीण डाक्टरों से दवा लेने को राजी हुये।

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दो नये मरीज मिले

ग्राम मनोरथपुर सहसोवारी निवासी सोनपाल का आठ वर्षीय पुत्र झब्बू व खुशीराम का पुत्र रामलड़ैते तेज बुखार आने पर सीएचसी लाए गए, वहां से उन दोनों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। प्रधान सिपाही लाल, राजाराम, अर¨वद वर्मा, मुन्ना लाल, बलवीर, ओमप्रकाश, मुकेश आदि ने सुधार न होने पर आन्दोलन की चेतावनी दी है।

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इन गांवों में फैली बीमारी

मनोरथपुर के अलावा पूर्वी हरेवा, जिगनेरा, टापर, चौखुटिया, सरायसाधौ, खंडहर, चैकिया, कटकिया, कटका गांवों में बुखार पैर पसार रहा है मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ग्राम गुरैया निवासी अधिवक्ता आदित्य दीक्षित ने प्रदेश सरकार से बीमारी से मरे सभी बच्चों के परिजनों को पांच-पांच लाख मुआवजा दिलाने की मांग की है।