यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 19, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सिस्टम की लापरवाही ने एक और मासूम की जान ली
संवाद सहयोगी, जलालाबाद: क्षेत्र के मनोरथपुर सहसोबारी में डिप्थीरिया बीमारी से पीड़ित दसवीं बच्ची ने इ

संवाद सहयोगी, जलालाबाद: क्षेत्र के मनोरथपुर सहसोबारी में डिप्थीरिया बीमारी से पीड़ित दसवीं बच्ची ने इलाज के अभाव में तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। नौ बच्चे इससे पहले नौ बच्चे इस बीमारी से दम तोड़ चुके हैं। बच्ची के पिता ने जिला अस्पताल में प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। दस बच्चों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य विभाग खानापूर्ति में लगा हुआ है। आसपास के गांव भी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। कुछ क्षेत्र में कुछ 12 बीमारी से 12 मौत हो चुकीं हैं। लक्ष्मी की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम से भी ग्रामीणों की नोकझोंक हुई। ग्रामीणों ने विभागीय टीम से दवा लेने से इन्कार कर दिया। स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
गांव में बीमार चल रहे बच्चों को वहां सही से इलाज में नहीं मिल रहा था। इन्हीं बच्चों में गांव के गुड्डू की पांच वर्षीय बेटी लक्ष्मी भी शामिल थी। लखनऊ से लौटने के बाद लक्ष्मी के परिजनों ने दो-तीन दिन तक उसका इलाज शहर के एक निजी चिकित्सक के पास कराया। जब उनके पास इलाज कराने के रुपये नहीं बचे तो वह उसको लेकर घर वापस चले गए। गुरुवार दोपहर लक्ष्मी की हालत अचानक बिगड़ी तो परिवार वाले उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। पिता गुड्डू के मुताबिक लक्ष्मी के भर्ती होने के बाद कोई भी डॉक्टर उसे देखने नहीं आ रहा था। रात में आठ बजे के बाद लक्ष्मी की हालत ज्यादा बिगड़ने पर गुड्डू सीएमओ आरपी रावत और एसडीएम सत्यप्रिय से भी इलाज न होने की शिकायत की। लेकिन उसे इसका कोई फायदा नहीं मिला। बच्चों का इलाज कर रहे डॉ. केपी ¨सह ने उसे जबरन लखनऊ के लिए रेफर कर दिया। इसके कुछ देर बाद रात में करीब 11.30 बजे लक्ष्मी ने दम तोड़ दिया।
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पिता गिड़गिड़ाने पर नहीं पसीजा डॉक्टर का दिल
लक्ष्मी की हालत बिगड़ने पर इमरजेंसी में तैनात नर्स ने डॉ.केपी ¨सह को कॉल करके बुलाया। डॉक्टर ने लक्ष्मी को देखने के बाद उसे लखनऊ ले जाने के लिए रेफर कर दिया। लक्ष्मी का पिता गिड़गिड़ाता रहा कि उसके पास बेटी के इलाज के लिए रुपये नहीं है, आरोप है कि लक्ष्मी को जबरन लखनऊ ले जाने के लिए रेफर कर दिया। वापस लौटते समय उसे कोतवाली पुलिस मिली। पुलिस किसी तरह से मनाकर गुड्डू और उसकी बेटी को जिला अस्पताल लेकर आई लेकिन यहां देखने वाला कोई नहीं था। इलाज के अभाव में मासूम लक्ष्मी ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
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दस बच्चों की मौत के बाद आई रिपोर्ट
सीएमओ डॉ. आरपी रावत ने बताया था कि शुरुआती दौर में बच्चों में डिप्थीरिया बीमारी के लक्ष्ण मिल रहे थे। इसकी पुष्टि के बीमारी से पीड़ित छह बच्चों की लार सैंपल लखनऊ लैब भेजा गया था। शुक्रवार को जांच की रिपोर्ट आई। इनमें चार बच्चों राधिका, शोभित, लक्ष्मी और ¨रकी में डिप्थीरिया के लक्ष्ण पाए गए थे। ¨रकी और लक्ष्मी की तो मौत हो गई। राधिका और शोभित का इलाज चल रहा है।
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आक्रोशित ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन
लक्ष्मी की मौत की खबर लगने के बाद गांव के लोगों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों का आरोप है कि चार दिन से गांव में कैंप नहीं लगाया जा रहा है। लक्ष्मी की मौत के बाद शुक्रवार की सुबह डॉक्टरों की टीम पहुंची तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट गया। टीम में पहुंचे डॉ. विजेंद्र, शशिकांत, एएनएम रजनी देवी एवं मयंक से ग्रामीणों की तीखी नोकझोंक हुई। ग्राम प्रधान सिपाही लाल के समझाने पर ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि कैंप में लाल-पीली गोली देकर खानापूर्ति की जा रही है। आंदोलन की चेतावनी दी है।
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दो बच्चों की हालत बिगड़ी
गांव में शुक्रवार को दो बच्चों की हालत बिगड़ गई। दोनों बच्चों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। गांव निवासी सोनपाल का आठ वर्षीय पुत्र झब्बू और खुशीराम का पुत्र रामलड़ैते को तेज बुखार और गले में सूजन की शिकायत मिली है। दोनों बच्चों को सीएचएसी के डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर किया है।
पांच-पांच लाख मुआवजा दिलाए जाने की मांग
मनोरथपुर साहसोबारी में दस बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा हरेवा पूर्वी एक युवक और गांव जिगनेरा में एक बच्चे की मौत हो गई है। पड़ोसी गांव पूर्वी हरेवा, जिगनेरा, टापर, चौखुटिया, सरायसाधौ, खंडहर, चौकिया, कटकिया, कटका आदि गांव में बुखार का प्रकोप फैल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक सीएचसी के प्रभारी डॉ. ज्ञानेंद्र ¨सह अब भी मामले को हल्के में ले रहे हैं। क्षेत्र में तैनात एएनएम के माध्यम से लाल-पीली गोलियां बांटी जा रहीं हैं। ग्रामीणों ने बीमारी से मरे बच्चों के परिजनों को मुआवजा और समुचित इलाज कराए जाने की मांग की है। गांव गुरैया निवासी अधिवक्ता आदित्य दीक्षित ने बीमारी से मरे सभी 11 बच्चों को सरकार से 5-5 लाख रुपये मुआवजा दिलाए जाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को को पत्र भेजा है।
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मृतक बच्चों की सूची
'मनोरथपुर सहसोबारी'
1. ¨रकी पुत्री बलवीर उम्र 8 वर्ष
2. लक्ष्मी पुत्री गुड्डू उम्र 5 वर्ष
3. नववर्ष पुत्र हरिपाल उम्र 6 वर्ष
4. संध्या पुत्री लालमन उम्र 6 वर्ष
5. दिव्यांशी पुत्री लालाराम उम्र 3 वर्ष
6. सुभाषना पुत्री फूल ¨सह उम्र 4 वर्ष
7. अनीता पुत्री राकेश उम्र 8 वर्ष
8. मालती पुत्री हाकिम ¨सह उम्र 5 वर्ष
9. कन्यावती पुत्री कन्हई लाल उम्र 7 वर्ष
10. बबलू पुत्र राकेश उम्र 14 दिन
'ग्राम हरेवा'
1. रामसागर पुत्र सत्यपाल उम्र 22 वर्ष
'ग्राम जिगनेरा'
1. नीतेश पुत्र बृजपाल उम्र 8 वर्ष
