यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 27, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दिमागी बुखार से मौतों का सिलसिला जारी
संतकबीर नगर : दिमागी बुखार यानी जापानी इंसेफ्लाइटिस से मौतों का सिलसिला जारी है। अब तक आधा दर्जन से

संतकबीर नगर : दिमागी बुखार यानी जापानी इंसेफ्लाइटिस से मौतों का सिलसिला जारी है। अब तक आधा दर्जन से अधिक मासूमों की मेडिकल कालेज में मौत के बाद भी विभाग का प्रयास विफल है। यह आंकड़ा विभाग का है जबकि धरातल पर कुछ और है जिसे विभाग स्वीकार करने से कतरा रहा है। विभागीय आकड़ों पर नजर डालें तो छह माह के भीतर छह मासूम व एक महिला जापानी बुखार की चपेट में आने से काल के गाल में संमा चुके हैं। लेकिन हकीकत में इनकी संख्या नौ पहुंच चुकी है। इन मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की नींद नही टूट रही है और हाथ - हाथ पर रखे बैठा है। जापानी बुखार या इंसेफ्लाइटिस एक ऐसा नाम है जिसका नाम सुनकर इस समय हर परिवार थर्रा उठता हैं। सभी यह कामना करते हैं कि उपर वाला उनके लाल को इस बीमारी से बचाये। बच्चे इस बुखार की चपेट में आकर अपनी जान गवां बैठे हैं और जो इससे बच भी गये हैं उनकी ¨जदगी मौत से बदतर है। इस महामारी को रोकने के लिये स्थानीय स्तर पर बेहद प्रयास किया पर नतीजा आज भी ढाक के तीन पात ही हैं। हर महीने मासूम मर रहे हैं पर कोई इनकी तरफ देखने वाला नही है। जापानी बुखार की चपेट में आए जिले के मासूमों के लिए मेडिकल कालेज इस समय मौतगाह बना हुआ है। इलाज के लिये जाने वाले मासूम वापस शायद ही वापस आ पाते है। इलाज के दौरान कुछ ही खुशनसीब बच पाते हैं और कई मासूमों की लाशें उनके परिजनों को सौंप दी जाती है। इन हंसते खेलते मासूमो का काल बना है एक वायरस जिसे Þइंसेफ्लाइटिसÞ का नाम दिया गया है।
जुलाई से इस रोग का असर इतना तेज हो जाता है हालात इतने खराब हैं कि जिले में इस बीमारी के लिए कोई व्यवस्था तक नही है। चिकित्सक की कमी के कारण आयूयीयू ही वेंटीलेटर पर चल रहा है। न तो इनके लिये दवाईयों की सुविधा है न ही बेड की। पहले मौते सिर्फ जापानी इंसेफ्लाइटिस से होती थी पर
अब इस समय एक दूसरा वायरस ए0ई0एस0 भी इन मौतों के लिये जिम्मेदार हैं। इससे मरने वाले बच्चों के आंकड़ों को छिपाने के लिये इसे ए0 ई0 एस0(एक्यूट इंसेफ्लाइटिस ¨सड्रोम) का नाम दे दिया गया।
साथ बड़ों को भी अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है और समय से इलाज मिलने पर जो खुशकिस्?मत बच भी जाते हैं उनकी मानसिक और शारिरिक स्थिति विक्षिप्?त और अपंगों जैसी हो जाती है और पूरी
उम्र वह दूसरों के ही सहारे जीवित रहते हैं।
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आंकड़े गवाह हैं
- अमृता पुत्री प्रेमचंद्र डेढ़ वर्ष निवासी रामपुर दक्षिणी हैंसर खलीलाबाद 8 जून
- शुभम पुत्र सुनील 2वर्ष निवासी बूधा खलीलाबाद 18 जुलाई
- अनम पुत्र अरमान 3 वर्ष निवासी केशारी खलीलाबाद 27 जुलाई- किशन पुत्र बेचन 8 माह निवासी बालूशासन खलीलाबाद 20 जुलाई- खुशबू पुत्री परमात्मा 7 वर्ष निवासी झझवा महुली
- सुमन पुत्री बुद्विराम 8 माह निवासी साफियाबाद दुधारा- इंदू पत्नी महेश 32 वर्ष निवासी रइमा खलीलाबाद
--------------------------विभाग को इन मौतों की जानकारी नहीं
- फरहान पुत्र वलीउल्लाह 4 वर्ष निवासी छाता दुधारा - विशाल पुत्र रम्मू 7 वर्ष निवासी रांची झारखंड कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के ग्राम झीनखाल में मासूम के पिता मुर्गी फार्म पर मजदूरी करते है।
1 अगस्त 2015
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सात मौतों की जानकारी : सीएमओ
जपानी बुखार से हुई मौतों के बारे में पूछने पर मुख्य चिकित्साधिकारी आनंद प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में जेई से कोई भी मौत नही हुई है। गोरखपुर बीआरडी कालेज से छह व बस्ती जिला चिकित्सालय से एक मौत ए0 ई0 एस0(एक्यूट इंसेफ्लाइटिस ¨सड्रोम) से हुआ है। दो अन्य मौतों के बारे में कोई जानकारी नही है।
