यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 05, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से शिशु की मौत

सम्भल। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते तीन माह के शिशु की रहस्यमयी बीमारी के कारण मौत हो गयी। जबकि गांव के आधा दर्जन से अधिक बच्चों की हालत गंभीर। मृतक शिशु के परिजनों का आरोप कि सूचना देने बाद भी स्वास्थ्य विभाग का कोई नुमाइंदा सुध लेने नहीं आया।
थाना क्षेत्र के गांव भकरौली में उस वक्त खलबली मच गयी जब गांव के वेदप्रकाश पुत्र कुबेरदत्त शर्मा के तीन माह के पुत्र जिगर की रहस्यमयी बीमारी के चलते मौत हो गई। शुक्रवार सुबह को जैसे शिशु की हालत ज्यादा बिगड़ी तो परिजनों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुन्नौर को सूचना दी। जब तक चिकित्सक वहां पहुंचते तब तक शिशु की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एक जुलाई को एएनएम ने गांव के सभी नवजात शिशुओं के डीटीपी, ओपीजी, पोलियो व हैपोटाइटिस आदि के टीके लगाये। तभी से मुहल्ले के आधा दर्जन से अधिक मासूमों को बुखार आ गया। और कुछ के हाथ व पैरों में सूजन आय गई। इसकी शिकायत चिकित्सक से की तो उन्होनें ने वर्फ से सेक करने की सलाह दी। बता दें कि मुशाहिद का 6 माह का पुत्र मौहम्मद जैद के भी चार माह पूर्व टीका लगा जिसका हाथ पका हुआ है। एक जुलाई को मेहदीहसन के पुत्र शोएब, डालचन्द्र की पुत्री पायल, शेर मोहम्मद की पुत्री खुशनुमा, पप्पू का पुत्र पुष्पेन्द्र, सोनू की पुत्री ममता व पुत्र रघु के भी टीकाकरण हुआ था ये सभी बुखार से पीड़ित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों के बीमार होने की सूचना स्वास्थ्य केंद्र में दी गयी थी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। बहरहाल शुक्रवार को तकरीबन 12 बजे चिकित्सकों की टीम गांव में पहुंची और बीमारी से ग्रसित बच्चों की जांच की। वहीं डॉक्टर नीरज गुप्ता ने बताया कि मैने आज ही चार्ज संभाला है। परिजन एएनएम पर आरोप लगा रहे हैं। जांच में दोषी पाए जाने पर कठोर कारवाई की जाएगी।
