यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 27, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गांवों में बुखार ने फैलाए पैर, एक की मौत

बेहट (सहारनपुर) : क्षेत्र का नौगांवा ग्राम समूह पिछले काफी दिनों से बुखार की चपेट में है। स्वास्थ्य विभाग कई दिन पहले सैकड़ों रोगियों की स्लाइड बनाकर ले जाने के बाद चुप्पी साध गया। इसके बाद स्लाइड की रिपोर्ट व दवाई देने की कोई जहमत नहीं उठाई गई, जिसके चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई गंभीर रोगी दिल्ली व देहरादून के अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं।
शायद स्वास्थ्य विभाग आंकड़ों में कहीं भी जिले में बुखार नहीं दिखाना चाहता। इसीलिए इस बीमारी को नजर अंदाज कर रहा है। नौगांवा ग्राम समूह के गांव समसपुर, हसनपुर, चकअबाबाकरपुर व काशीपुर मलेरिया, टाइफाइड व वायरल की जबरदस्त चपेट में पिछले करीब दो सप्ताह से है। एक बार समाचार पत्रों में यहां का हाल प्रकाशित होने के बाद जिला मलेरिया अधिकारी के साथ सीएचसी की टीम तक गांव पहुंची थी और करीब 150 से भी अधिक लोगों के खून के नमूने लेकर स्लाइड बनाई गई थी। इसके बाद आज तक किसी स्वास्थ्य कर्मी तक ने गांव में स्लाइड की रिपोर्ट बताने अथवा उसके अनुसार उपचार करने की जहमत नहीं उठाई। अब हाल यह है कि साधन संपन्न पीड़ित तो अन्यत्र अच्छे अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, लेकिन गरीब पीड़ित गांव में कराह रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित आत्माराम चौहान की मंगलवार की रात मौत हो गई। उसे टाइफाइड बताया गया था, जबकि ग्राम प्रधान सतीश चौहान की पत्नी किरण, पुत्र हर्षित व भाई अशोक चौहान देहरादून के निजी अस्पताल में उपचार करा रहे हैं। हसनपुर का ही पुष्पेन्द्र कुमार दिल्ली के अस्पताल में हैं। ज्ञान सिंह व नेत्रपाल चौहान सहारनपुर में निजी अस्पताल में ही इलाज कराने को मजबूर हैं। इन तीनों गांवों में 200 से अधिक महिला-पुरुष व बच्चे बुखार से पीड़ित हैं।
नीली मक्खी ढहा रही कहर
बेहट : गांव में नीली मक्खी का भयंकर प्रकोप ग्रामीणों को संक्रामक रोग की चपेट में झोंक रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से गांव के पास पोल्ट्री फार्म खुला है, उसके कुछ दिन बाद से ही गांवों में नीली मक्खी दिखाई देने लगी और धीरे-धीरे उसका प्रकोप बढ़ता चला आ रहा है। सामान्य मक्खी से मोटी और नीले रंग की यह मक्खी ग्रामीणों को खाने व सोने तक नहीं देती। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन को इस समस्या के बारे में बताया जा चुका है, लेकिन आज तक इसका समाधान कराने को कोई तैयार नहीं है। पिछले दिनों मलेरिया की टीम गांव पहुंची थी, तो ग्रामीणों की शिकायत पर यह टीम पोल्ट्री फार्म भी गई थी। लेकिन वहां से कुछ सामान के साथ लौटने के बाद ग्रामीणों के सामने इस फार्म की वजह से कुछ भी न होने की बात कहकर फार्म को क्लीन चिट देकर लौट गई थी।
