यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 24, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मलेरिया, टायफाइड से कांप रही जिदंगी

सहारनपुर : मलेरिया, टायफाइड के बढ़ रहे प्रकोप से हजारों जिदंगी बुखार से कांप रही हैं। जिला अस्पताल को पूरी तरह मलेरिया और टायफाइड ने जकड़ लिया है। जिला अस्पताल में पिछले तीन दिन में 221 से ज्यादा पीड़ितों को भर्ती कराया गया। देहात में भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो पर बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बुखार से अभी तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। मलेरिया व टायफाइड का प्रकोप इतना बढ़ चुका है कि जिला अस्पताल में पहुंचने वाला हर दूसरा मरीज मलेरिया से पीड़ित है। पहले से ही सुविधाओं के अभाव में बदहाल जिला अस्पताल में मलेरिया के इतने केस पहुंचने से अस्पताल कर्मियों के हाथ पांव फूल रहे है। अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। देहात के भी कई क्षेत्रों में मलेरिया के अधिक के अधिक केस सामने आने से कई क्षेत्रों को संवेदनशील माना जा रहा है।
-इन क्षेत्रों में बढ़ रहा प्रकोप
देहात के कई क्षेत्रों में मलेरिया के मामले अधिक सामने आ रहे है। गंगोह, नागल, बेहट, मिर्जापुर में मलेरिया से पीड़ित रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गंगोह में अभी तक एक हजार से अधिक मलेरिया के केस सामने आ चुके हैं। नागल में 600, बेहट में 550, से अधिक मामले सामने आये है। नागल और गंगोह में अभी तक आधा दर्जन से ज्यादा मौतें बुखार से हो चुकी है। अन्य क्षेत्रों को भी मलेरिया, टायफाइड अपनी चपेट में ले रहा है।
-दावों से उलट है हकीकत
मलेरिया, डेंगू, टायफाइड हर वर्ष मलेरिया से हजारों जिदंगी प्रभावित होती है। इस बार स्वास्थ्य विभाग ने इन जानलेवा बुखारों के प्रकोप को बढ़ने से रोकने के लिए बडे़-बड़े दावे किये थे। लेकिन मलेरिया के बढ़ रहे प्रकोप ने सभी दावों की पोल खोल कर रख दी। मलेरिया को रोकने जो दावे विभाग ने किये थे हकीकत उनसे उलट है। मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है और विभाग मूक दर्शक बना है। जिला अस्पताल में मलेरिया के इलाज के लिए जो दवाई मंगाई गई है वे इनसे लड़ने में कारगर नहीं है, न ही स्टाफ की ही पूरी व्यवस्था की गई है।
- अस्पताल में मरीजों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं
जिला अस्पताल में मलेरिया, टायफाइड से कांप रहे मरीजों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। बिना किसी उपचार के या तो मरीज अपनी जिदंगी को खतरे में डाल रहे है या फिर निजी चिकित्सालयों में इलाज कराने को मजबूर है। जागरण टीम ने जब मरीजों का हा जाना तो उनके दर्द की दास्तां सुनकर हैरान रह गये। पिछले चार दिन से अस्पताल में भर्ती सरसावा निवासी साबिर, कपासी नागल निवासी रजत, नवादा निवासी मोसिन, व सोनी ने बताया की उन्हे यहां भर्ती हुए चार दिन हो गये सभी की मेडिकल रिपोर्ट में मलेरिया आया है, लेकिन यहां पर उनका कोई इलाज नही हो रहा है ना ही उन्हे कारगर दवाई ही दी जा रही है। इलाज के लिए उनसे पैसों की मांग की जा रही है। उनके लिए खाने तक की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। बुखार से कहरा रहे साबिर की मां शबीना ने बताया कि उसका बेटा बुरी तरह कहरा रहा था लेकिन कई बार बुलाने के बाद भी चिकित्सक उसे देखने नही आये।
-मलेरिया, टायफाइड के लक्षण
मलेरिया व टायफाइड से पीड़ित मरीज को तेज सिर में दर्द, कमर दर्द, जोड़ों में दर्द के साथ मांसपेशियों में एंव आंखों के पीछे दर्द। तेज ठंड के साथ एक दिन छोड़कर बुखार आना
-बचाव कैसे करें
कूलर टंकी को सप्ताह में एक बार साफ अवश्य करें, दोबारा पानी भरने से पहले टंकी को अच्छी तरह से सुखा लें
जहां कूलरों की टंकी को साफ करना संभव न हो वहां एक चम्मच डीजल या मिट्टी के तेल की डाल दें
घरों के पास पानी जमा न होने दें
रात को सोते समय पूरी आसतीन की कमीज पहने
बुखार आने पर नजदीक के चिकित्सक से संपर्क करें, तेज बुखार होने पर नजदीक के अस्पताल में भर्ती हो जाएं
घर में यदि कोई बुखार का रोगी है तो उसे मच्छरदानी से बाहर न आने दें
पीड़ित व्यक्ति को दर्द निवारक तथा बुखार की औषधि पेरासिटामाल दिया जाना चाहिए
रक्त की जांच बुखार से पांच दिन बाद ही करानी चाहिए।
-क्या कहते हैं अधिकारी
मलेरिया को फैलने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे है। जिन क्षेत्रों में अधिक मामले सामने आ रहे है वहां विशेषज्ञों की टीम भेजी जा रही है। रोगियों को बेहतर इलाज दिया जा रहा है।
सीएमओ, वीके दत्ता।
अस्पताल में मरीजों को हर सुविधा मुहैया कराई जा रही है। इलाज में कोई भी लापरवाही नहीं बरती जाएगी। यदि कहीं से कोई शिकायत मिलती है तो उसकी जांच की जाएगी।
सीएमएस, मांगेराम मलिक।
