यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 10, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बुखार से जनपद में अब तक सौ से अधिक मौत

सहारनपुर : बुखार ने इस बार पूरे जनपद में कहर बरपा रखा है। अब तक केवल बुखार के चलते सौ से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। बुखार से हुई मौतें स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा रही हैं।
एक ओर से जनस्वास्थ्य के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य महकमे के लिए समय से पहले ही बजट जारी किया जाता है। इसके बाद भी इस बार बुखार ने पूरे जनपद को सकते में डाल दिया। इस बार सर्वाधिक बुखार के रोगी सामने आए हैं। अगस्त से शुरू हुआ बुखार का प्रकोप अभी तक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बार पूरे जनपद में सिर्फ बुखार के तीन लाख से अधिक रोगी सामने आए हैं। इनमें से सौ से अधिक रोगियों ने दम तोड़ दिया। इधर, स्वास्थ्य विभाग की ओर से न तो फॉगिंग की गई और न मानकों के अनुसार दवाओं का छिड़काव किया गया। इसके चलते लार्वा और फिर मच्छरों का प्रकोप लोगों के लिए मुसीबत बन गया।
यहां हुई मौतें
सहारनपुर - 27
देवबंद - 12
इस्लाम नगर- 10
छुटमलपुर- 7
नागल- 14
नानौता- 11
बेहट- 9
सरसावा-5
गंगोह- 22
स्वास्थ्य विभाग के दावे
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मौत होने का कारण डेंगू या मलेरिया नहीं है, क्योंकि बुखार तो किसी भी बीमारी में होना आम बात है। बता दें कि बुखार ने इस बार जिस प्रकार से कोहराम मचाया है, उसने सभी के होश उड़ा कर रख दिए हैं। दरअसल, डेंगू के इस बार सर्वाधिक रोगी सामने आए। निजी चिकित्सक, सरकारी अस्पताल व सीएचसी व पीएचसी पर रोगियों के लिए बेड कम पड़ गए। जनपद से करीब एक हजार से अधिक मरीजों को पड़ोसी राज्यों में हायर सेंटर रेफर किया गया। स्वास्थ्य विभाग इन रोगियों की संख्या पर पर्दा डालता रहा। विभाग के पास आज भी डेंगू के रोगियों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने फीवर सर्वे भी कराया इसके बाद भी यह सर्वे केवल फाइलों में कैद होकर रह गया।
इनका कहना है..
किसी भी बीमारी में बुखार होना आम बात है, मगर अब बुखार का प्रकोप कम हो गया है। उम्मीद है कि एक सप्ताह में मलेरिया और डेंगू का प्रकोप खत्म हो जाएगा। सरकारी व निजी अस्पतालों में भी बुखार पीड़ितों की संख्या में कमी आई है। फीवर सर्वे पूरा हो चुका है। जहां भी बुखार पीड़ित सामने आए हैं सभी की स्लाइड बनवाई गई हैं।
डा. ओपी सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी।
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