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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 14, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

झोलाछाप के इंजेक्शन से बालक की मौत

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Published: Mon, 14 Jul 2014 01:09 PM (IST)

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रामपुर। झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान ठंडा पड़ गया है। इसके चलते झोलाछाप फिर मौत बांटने लगे हैं। अब गंज थाना क्षेत्र में एक झोलाछाप के इंजेक्शन ने मासूम की जान ले ली। काफी हंगामा हुआ। परिजनों में चीख पुकार मची, लेकिन यह चीख स्वास्थ्य विभाग के कानों तक नहीं पहुंच सकी। गंज पुलिस जरूर मौके पर पहुंची, लेकिन वह भी बिना कार्रवाई के वापस लौट आई।

गंज थाना क्षेत्र के मुहल्ला सतूने संग नई बस्ती निवासी आसिफ मेहनत मजदूरी करते हैं। उनके आठ साल के बेटे दिलशाद की शनिवार को तबियत खराब हो गई। उसे उल्टी दस्त की शिकायत थी। देर शाम को परिजन उसे मुहल्ले में ही किराये के मकान में क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप चिकित्सक के पास ले गए। उसने बच्चे को इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद बच्चे की हालत और बिगड़ गई। घर ले जाते समय रास्ते में ही बच्चे की मौत हो गई। परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन वापस क्लीनिक जाने लगे। तब तक झोलाछाप को जानकारी हो गई और वह दुकान बंद कर फरार हो गया। बच्चे की मौत की खबर से लोगों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने क्लीनिक के बाहर हंगामा किया। सूचना मिलने पर गंज पुलिस पहुंच गई। मगर झोलाछाप के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

उधर स्वास्थ्य विभाग को 24 घंटे बाद भी घटना की जानकारी नहीं हो सकी। सीएमओ डा.आलोक कुमार मिश्रा ने बताया कि झोलाछाप के खिलाफ किसी ने शिकायत नहीं की। अब मामला उनकी जानकारी में आया है, वह इसे दिखवाएंगे। झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी हो चुकी हैं कई मौतें

झोलाछाप के इलाज से जिले में पहले भी कई मौतें हो चुकी हैं। वजह है स्वास्थ्य विभाग की दरियादिली। स्वास्थ्य महकमा झोलाछापों पर मेहरबान रहता है। इससे शहर और गांवों में मौत की दुकानें खुलेआम चल रही हैं। 20 मई 2013 को अजीमनगर के ग्राम भोट बक्काल में 60 वर्षीय मुजफ्फर, उनकी पत्‍‌नी 55 वर्षीय मेहरूल निशा और तीन साल की पोती सायरीन की झोलाछाप की दवा से मौत हो गई थी। वर्ष 2012 अक्टूबर माह में अजीतपुर में झोलाछाप के यहां प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत हो गई थी। छह सितंबर 2013 को शहजादनगर थाना क्षेत्र के ग्राम चमरपुरा निवासी मुकेश के डेढ़ साल के बेटे अनमोल को बुखार होने पर गांव के झोलाछाप से दवा दिलाई गई। बाद में उसकी भी मौत हो गई। पिछले माह शाहबाद के चौकोनी गांव में दो बच्चों की मौत झोलाछाप के इलाज से हुई। इतनी मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा।