यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 28, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सरकारी अस्पताल में डेंगू पीड़ितों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं

पीलीभीत : नगर समेत समूचे क्षेत्र में डेंगू बुखार का कायम है। जानलेवा बुखार से जहां लोगों की रातों की नींद उड़ी हुई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसकी रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नही उठाए गए है। बल्कि कागजी खानापूरी कर ही कर्तव्यों की इतिश्री की जा रही है। क्षेत्र में पिछले एक माह से डेंगू बुखार का कहर जारी है। इसकी चपेट में दो बालिकाओं सहित लगभग आधा दर्जन लोगों की मृत्यु हो चुकी है। जबकि दर्जनों की संख्या में अभी भी लोग डेंगू बुखार से ग्रसित होकर बरेली के निजी चिकित्सालयों में अपना उपचार करा रहे है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डा.ठाकुरदास का कहना है कि डेंगू प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए टीमें गठित कर दी गयी है। पालिकाध्यक्ष छेदालाल बताया कि मच्छरों के सफाए के लिए उन्होंने आज से प्रत्येक वार्ड में घ्र-घर जाकर कीटनाशक दवा का छिड़काव कराना शुरू कर दिया है। सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय के व्यवस्थापक ब्रहम्मौतार अग्रवाल का कहना है कि प्रशासन को डेंगू बुखार से निपटने के लिए सरकारी अस्पताल में विशेष सुविधाएं मुहैय्या करानी चाहिए। शिक्षक बाबूराम गंगवार का कहना है कि डेंगू मच्छर के सफाए के लिए प्रशासन को विशेष अभियान चलाना चाहिए। ग्यासपुर निवासी पूर्व पालिकाध्यक्ष डा.नूर अहमद अंसारी की पत्नी रेहाना बेगम का कहना है कि सफाई व्यवस्था लचर होने की वजह से डेंगू मच्छरों का आतंक जारी है।
ब्लाक प्रमुख तारावती गंगवार ने बताया कि उन्होंने ग्रामीण अंचलों में तैनात सफाई कर्मियों को अपने-अपने ग्रामों में सफाई व्यवस्था दुरूस्त रखने के लिए कड़े निर्देश दिए है।
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