यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 29, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
तेज बुखार से आठ वर्षीय बच्ची की मौत
मुरादाबाद : तेज बुखार से पीड़ित एक बच्ची की जिला अस्पताल में मौत हो गई। पिछले एक सप्ताह से उल्टी-दस्त

मुरादाबाद : तेज बुखार से पीड़ित एक बच्ची की जिला अस्पताल में मौत हो गई। पिछले एक सप्ताह से उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद सोमवार को उसे बुखार आया था। बच्ची को मंगलवार की सुबह ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
लाइनपार की रेलवे कालोनी के पास रहने वाले वासुदेव की आठ वर्षीय पुत्री आरती को सोमवार की शाम तेज बुखार आ गया। उसे मुहल्ले के ही एक डॉक्टर को दिखाया गया। रात में आरती की तबीयत ज्यादा खराब हो गई। बेहोशी छाने के साथ ही सांस लेने में परेशानी होने लगी। इसके बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। तड़के करीब चार बजे आरती बेहोशी की हालत में जा चुकी थी। इस पर डाक्टरों ने उसे कहीं दूसरी जगह ले जाने को कहा। घबराए माता-पिता बच्ची को लेकर जिला अस्पताल आए। चिकित्साधीक्षक व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीर सिंह की निगरानी में उसका एक्सरे व खून की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट मिलने से पहले ही दोपहर करीब 12 बजे आरती ने दम तोड़ दिया। इसके बाद उसके परिजनों में कोहराम मच गया। डॉ. बीर सिंह ने बताया कि एक्सरे में बच्ची के फेफड़ों में पानी भरा हुआ आया है। काफी कोशिश के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
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आरती की मौत ने बजाई खतरे की घंटी
- विशेषज्ञों के अनुसार तेज बुखार के साथ बेहोशी आना चिंताजनक
- दिमाग में सूजन के साथ आती है ऐसी बेहोशी
अभिषेक आनंद, मुरादाबाद : जिला अस्पताल में मासूम की मौत ने महानगर में स्वास्थ्य विभाग के लिए खतरे का संकेत दे दिया है। भले ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अभी इसे आम बुखार ही माने लेकिन जो संकेत हैं कि उससे लग रहा है कि महानगर में कोई घातक वायरस दस्तक दे रहा है। यदि वक्त रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो सर्दियों से पहले महानगर में कोई बड़ी बीमारी पैर पसार सकती है।
आमतौर पर दीपावली के आसपास वायरल का प्रकोप रहता है। चूंकि मौसम बदल रहा होता है, इसी के चलते डेंगू की प्रबल आशंका रहती हैं। यह बुखार पांच से सात दिन रहता है। डेंगू में छह दिन बाद बेहोशी आने लगती है, लेकिन आठ साल की आरती की जिस तरह मौत हुई, वह चिंताजनक है। आरती को सोमवार की शाम से बुखार आया और उसे बेहोशी सी छाने लगी। रात में सोने के साथ ही उसे सांस लेने में दिक्कत शुरू हो गई। एक्सरे में फेफड़ों में पानी भरने की बात सामने आई है। डॉ. बीर सिंह का मानना है कि बच्ची के दिमाग की नसों में सूजन आ गई होगी। जिससे उसे बेहोशी आ रही होगी। 20 घंटे से कम वक्त में ही आरती की मौत हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा आमतौर पर होता नहीं है। यह एक अजीब सा केस है। यदि बच्ची की बीमारी पुरानी होती तो माना जा सकता था कि उसे दूसरी बीमारियों के संक्रमण से ऐसा हो सकता है, लेकिन इस बुखार से तो ऐसा लग रहा है कि कोई नया वायरस महानगर में दस्तक दे रहा है।
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पिछले काफी वक्त से घर में ही थी आरती
आरती के परिजनों के अनुसार, वह काफी दिनों से महानगर से बाहर नहीं गई थी। ऐसे में दूसरे स्थान से कोई संक्रमण आने की बात भी समझ में नहीं आ रही है।
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विशेषज्ञों की बात
'मैंने सुबह बच्ची को देखा था, उसे गंभीर हालत में लाया गया था। बेहोशी के साथ ही सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। एक्सरे में पता लगा कि उसके फेफड़ों में पानी भरा हुआ था। जिस तरह से उसका व्यवहार था उससे लग रहा था कि दिमाग की नसों में सूजन आ गई होगी। परिजनों के अनुसार कोई पुरानी केस हिस्ट्री भी नहीं है। ऐसे में एकाएक उसकी हालत इस तरह कैसे बिगड़ गई, ये समझना थोड़ा मुश्किल रहा।
- डॉ. बीर सिंह, चिकित्साधीक्षक व बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
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'मैनें केस देखा नहीं है लेकिन जैसा बताया जा रहा है, ये अजीब सा केस है, आमतौर पर बुखार के दौरान बेहोशी वाली स्थिति तीन से चार दिन बाद आती है। या तो बच्ची के परिजन कुछ छिपा रहे हैं या कोई नए तरीके का वायरल दस्तक दे रहा है।
- डॉ. नितिन बत्रा, सीनियर फिजीशियन
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जिम्मेदारों की बात
'मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है, बुधवार को इस पूरे मामले के बारे में जानकारी लूंगा, साथ ही सारी जांच रिपोर्ट भी देखूंगा। जरूरत पड़ी तो बच्ची के घर भी स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाएगी। हरसंभव कोशिश की जाएगी कि इस मौत के कारणों के बारे में पता कराया जाए।
- डॉ. संजीव यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुरादाबाद
