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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 20, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कोमा में सरकारी अस्पताल, मरीज हुए बेहाल

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Published: Fri, 20 Sep 2013 12:25 AM (IST)Updated: Fri, 20 Sep 2013 12:26 AM (IST)

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मुरादाबाद। जानलेवा बुखार के मामले में स्वास्थ्य अधिकारियों ने भले ही सेवाओं के चाकचौबंद होने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी हो, मगर उनकी व्यवस्थाओं की पोल तब खुल गई, जब दैनिक जागरण ने जिलेभर में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल की। बुधवार व गुरुवार की पड़ताल में खुलासा हो गया कि बुखार तो नियंत्रण से बाहर है ही, विभागीय अधिकारी व कर्मचारी भी मनमाने तरीके से ही काम कर रहे हैं। मूंढापांडे क्षेत्र में बुखार के साथ चर्मरोग भी तेजी से फैल रहे हैं। परेशान रोगी सरकारी उपचार पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। पेश है एक रिपोर्ट।

अस्पतालों की स्थिति

जिले में मंडलीय चिकित्सालय से लेकर देहात के स्वास्थ्य केंद्र तक डाक्टरों व मेडिकल स्टाफ की कमी है। जुकाम, बुखार, खांसी के अलावा अन्य दवाएं स्टोर में उपलब्ध नहीं, एंटी रैबीज इंजेक्शन और सर्पदंश के वक्त जरूरी इंजेक्शन का भारी टोटा है। मंडलीय चिकित्सालय की ब्लड बैंक में सिर्फ खून मिलने की स्थिति उपलब्धता पर निर्भर रहती है।

ø जांच प्रक्रिया

मंडलीय चिकित्सालय में जांचों के लिए क्षेत्रीय निदान केंद्र (आरडीसी) स्थापित है लेकिन यहां रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, लैब व एक्सरे टेक्नीशियन के पद ही सृजित नहीं हुए हैं। सीटी स्केन मशीन स्टाफ के अभाव में तो अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने से रोगियों को लाभ नहीं दे पा रहीं।

ø इमरजेंसी में इलाज

मंडलीय चिकित्सालय को छोड़कर अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर इमरजेंसी सेवाएं भी बेहाल हैं। डाक्टरों की कमी से ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल आफिसर) का सही रोस्टर ही नहीं बन पाता। इसके चलते इमरजेंसी केस आने पर अक्सर डाक्टर को घर से बुलाया जाता है।

ø डाक्टरों की कमी

मंडल स्तरीय अस्पताल में 12 डाक्टर कम हैं तो दो पद जिला महिला चिकित्सालय में खाली हैं। इसके अलावा जिले में ग्रामीण स्तर तक फैले नेटवर्क में 65 चिकित्सकों का टोटा है।

नहीं मिलते डाक्टर

कांठ : बुधवार को सुबह नौ बजे चिकित्सक मृणाल राठी ही अस्पताल में मौजूद थे। बताया गया कि सीएचसी प्रभारी डा.अरुण तोमर तहसील दिवस में और डा.जुल्फिकार को पल्स पोलियो अभियान में लगाया गया है। चिकित्सक चित्रेश, दंत चिकित्सक डा.अलका ंिसह व डा.जूही अग्रवाल नहीं मिलीं। यही हाल गुरुवार को भी मिला। अधिकांश चिकित्सक गायब मिले। दवा लेने आए हरपाल सिंह, बिजेंद्र सिंह, खचेड़ू सिंह, रामकुमार, सुल्तान आदि ने बताया कि चिकित्सक नहीं मिलते, इसलिए बगैर उपचार घर लौटना मजबूरी है।

फार्मेसिस्ट के भरोसे अस्पताल

छजलैट : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सदरपुर मतलबपुर पर डा.शलभ की तैनाती प्रभारी के रूप में है मगर वह लंबे अवकाश पर हैं। अस्पताल फार्मेसिस्ट राजेंद्र गौतम के सहारे चल रह है। महिला चिकित्सक की तैनाती भी नहीं है।

केवल पीएचसी की सुविधा

डिलारी : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन वर्षो पहले बनकर तैयार हो चुका है। अस्पताल डिलारी के प्रभारी डा.ब्रहमपाल सिंह ने बताया कि अस्पताल में पीएचसी स्तर की सुविधाएं हैं।

मूंढापांडे में दवा की कमी

मूंढापांडे : मूंढापांडे के उमेश (55) बुखार से पीड़ित हैं, तीन दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। बाहर से दवाइयां मंगा रहे हैं। उधमपुरा निवासी ओमवती (60) ने बताया कि पंद्रह दिन से वे चर्मरोग से पीड़ित है, चार दिन बाद भी दवा नहीं मिली है।

डाक्टर शाहनवाज खान ने बताया कि हमें जिले से दवाइयां कम मिल रही हैं। मौके पर डाक्टर नरेंद्र कुमार, शाहनवाज खान और शादाब उस्मानी मिले।

रेफर सेंटर बना कुंदरकी अस्पताल

कुंदरकी : ब्लाक क्षेत्र की 94 ग्राम पंचायतों के बाशिंदों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ब्लाक मुख्यालय पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, इसके अलावा रतनपुर कलां, डींगरपुर, मैनाठैर व महलोली ग्रामों में उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ओपीडी में प्रतिदिन चार सौ रोगी आते हैं। यहां आधा दर्जन डाक्टर तो हैं सुविधाओं के अभाव में रोगियों को रेफर कर दिया जाता है।

न डाक्टर न बेड, फिर कैसे हो इलाज

अगवानपुर : स्वास्थ केंद्र की अव्यवस्था के हालात ये हैं कि यहां दो बेड हैं और दोनों टूटे पड़े हैं। यहां किसी डाक्टर की तैनाती भी नहीं है, बल्कि यहां आयुर्वेदिक डाक्टर ही इलाज कर रहे हैं। लैब तो है लेकिन विशेषज्ञ नहीं होने से वह शोपीस बनकर रह गई है।

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