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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 03, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सबको पता है, क्या गुजर रही पाक-बांग्लादेश में हिंदुओं पर

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Published: Wed, 03 Apr 2013 08:52 PM (IST)

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शरद अवस्थी, वृंदावन: दुनिया भर में हिंदुत्व की पैरोकारी कर रहे हिंदू स्वयंसेवक संघ को अफसोस है कि कुछ देशों में उनकी शाखाएं नहीं हैं। खासतौर पर पाकिस्तान और बांग्लादेश में। कहते हैं सबको पता है कि इन देशों में हिंदुओं पर क्या गुजर रही है? संघ के सामने सबसे बड़ी चुनौती अगली पीढ़ी को हिंदुत्व में ढालने की है। इसकी कोशिशें जारी हैं।

हिंदू स्वयंसेवक संघ के अंतरराष्ट्रीय सह संयोजक रवि कुमार को पाकिस्तान, बांग्लादेश और फिजी में हिंदू स्वयं सेवक संघ की शाखाएं न होने का मलाल है। पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर किये गए सवाल पर वह खामोश हो गये। लेकिन अंदाज में इशारा स्पष्ट था, कि वहां हिंदुओं के साथ जो हो रहा है सबके सामने है। इतना जरूर बोले कि फिजी में सबसे ज्यादा आत्महत्या हिंदू कर रहे हैं। जब यह पूछा गया कि इन देशों में हिंदुओं के मंदिर तोड़े जा रहे हैं, उनका उत्पीड़न हो रहा? इस पर प्रश्न भरे लहजे में बोले आप बताइये..।

भारत में ही भारतीय संस्कृति को बहुसंख्यक लोगों द्वारा न मानने के सवाल पर रविकुमार साफगोई से कहते हैं कि संस्था विश्व के चालीस राष्ट्रों में (सभी विदेशी) कार्य कर रही है। वहां बसे तीन करोड़ भारतीयों और उनके बच्चों और उनके बच्चों को अभ्यास वर्ग और बैठक के जरिए सुशिक्षित कर रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती विदेशों में बसी नयी पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषा से जोड़ना है। इसके लिए वह 30 सालों से नियमित शिविर आयोजित कर रहे हैं। उन्होंने संतोष प्रकट करते हुए बताया कि आस्ट्रेलिया, हांगकांग आदि देशों में लाखों युवा मंगलवार और गुरुवार को केवल शाकाहारी भोजन करते हैं। वह भारतीय संस्कृति को जानने और समझने को लालायित रहते हैं। हिंदी और संस्कृत में तो हजारों बच्चे निपुण हो चुके हैं। इतना ही नहीं गैर भारतीय बच्चों में हिंदी के प्रति भारी लगाव बढ़ा है। वह लोग हिंदी और भारत की संस्कृति को अपना रहे हैं।

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