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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 10, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जिला अस्पताल बीमार, मरीज बेहाल

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Published: Sat, 10 Aug 2013 07:20 PM (GMT+05:30)Updated: Sat, 10 Aug 2013 07:21 PM (GMT+05:30)

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मैनपुरी: महाराजा तेज सिंह जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों और दवाओं का टोटा तो चल ही रहा है। लेकिन अब तो यहां इंजेक्शन और बोतलें भी समाप्त हो गयी हैं। आखिर गरीब, मजदूर और किसान को कैसे मिल सकेगा बेहतर इलाज? जब अस्पताल खुद ही है बीमार।

पिछले छह माह से जिला चिकित्सालय डॉक्टरों के अभाव से जूझ रहा है। अस्पताल से एक दर्जन चिकित्सकों का गैर जनपद स्थानान्तरण होने के बाद यहां मात्र दो चिकित्सक ही भेजे गये हैं। जिससे यहां की व्यवस्था पूरी तरह पंगु हो गयी है।

अस्पताल का पैथोलॉजी विभाग पैथोलॉजिस्ट न होने से बंद हो गया है। वहीं अल्ट्रासाउंड विभाग भी रेडियोलॉजिस्ट की कमी से बंद है। दवाओं का आलम तो यह है कि यहां लगभग हर मर्ज में काम आने वाली एंटीवायटिक टेबलेट एक माह से नहीं हैं। अब तो यहां बच्चों को दी जाने वाली 5 फीसद बोतल एसोलाइट पी और जेंटामाइशिन इंजेक्शन भी समाप्त हो गये हैं।

अस्पताल के वार्डो में मरीज लिटाने के लिए जगह नहीं रही है। अब मरीजों को अस्पताल के बरामदे में लेटना पड़ रहा है और उनकी बोतल जंगले पर लटका कर उन्हें उपचार दिया जा रहा है।

शनिवार को अस्पताल पहुंचे 1730 मरीज

जिला चिकित्सालय में यकायक संक्रामक रोगियों की संख्या में इजाफा देखने को मिला। अस्पताल में डायरिया से पीड़ित सात जबकि बुखार से पीड़ित 11 मरीजों को भर्ती कराया गया। शनिवार को अस्पताल में 1730 मरीजों को उपचार दिया गया।

एक-दो दिन में आ जाएंगी दवाएं

जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरसी शर्मा ने बताया कि सभी दवाओं की डिमांड भेज दी गई हैं। उम्मीद है कि एक-दो दिन में ही दवाओं की उपलब्धता हो जाएगी।

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