यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 07, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
देर रात लखनऊ पहुंचे सुब्रत रॉय, मां को समर्पित किया लेख
दो वर्ष से अधिक समय से दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय सहारा कल देर रात ...और पढ़ें

लखनऊ। दो वर्ष से अधिक समय से दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय सहारा कल देर रात लखनऊ पहुंचे। विशेष विमान से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे सुब्रत रॉय ने सीधे सहारा शहर, गोमतीनगर का रुख किया। आज वह अपनी मां की अंत्येष्टि में शामिल होंगे।
सुब्रत रॉय सहारा को मां के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह की पैरोल दे दी है। सुब्रत के अलावा जेल में बंद कंपनी निदेशक उनके बहनोई अशोक रॉय चौधरी को भी सुप्रीम कोर्ट पैरोल मिल गई है। यह दोनों एक साथ लखनऊ पहुंचे। कोर्ट ने सुब्रत को प्रोटेक्टिव पुलिस कस्टडी में पैरोल दी है जिससे कि इस दौरान सुब्रत के साथ सादी वर्दी में पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे। सुब्रत और उनके बहनोई ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मां के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए तीन सप्ताह की पैरोल देने की मांग की थी। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए चार हफ्ते के लिए पैरोल दी। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि सुब्रत मां के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए लखनऊ जा सकते हैं। इसके अलावा वे हरिद्वार व गंगा सागर भी जा सकते हैं।
सुब्रत रॉय सहारा कल देर रात चार्टर्ड प्लेन से लखनऊ के एयरपोर्ट पर उतरे। इसके बाद उन्होंने गाडिय़ों के काफिले के साथ अपने निवास सहारा शहर की ओर रुख किया, जहां पर अंतिम दर्शक के लिए उनकी मां स्वर्गीया छबि राय का शव रखा गया है।
शिक्षक और दर्शनिक थीं मां : सहारा श्री
मां के निधन पर सहारा श्री ने अपनी कलम से उन्हें भावभीनी श्रृद्धांजलि दी है। सुब्रत रॉय सहारा ने लिखा है कि किस तरह कठिन समय में मां ने हमेशा अपने आंचल की छांव और मार्गदर्शन दिया। मां की ममता की छांव केवल उनको ही नहीं, बल्कि लाखों कर्मयोगियों को मिली, जिनको वह जानती थीं। हर किसी को प्यार देना ही उनकी पहचान थी। सबसे लगाव था। हर कोई उनका अपना था। बहुत कम लोगों में इस तरह का प्यार दूसरों के लिए होता है। यही वजह थी कि मां सबसे अलग थीं। यह उनके ही प्रेम और आदर्शो का ही प्रभाव है कि हम भाई और बहनों ने हमेशा दुनिया को सकारात्मक तरीके से देखा। मां हमेशा कहतीं थीं कि हर व्यक्ति में सकारात्मक पहलू ही देखनी चाहिए। उनके जानने वालों बड़ा दायरा था। रोजाना सैकड़ों फोन आते थे और सबसे बात करती थीं। दोस्तों और करीबियों से लेकर रिश्तेदारों और सहारा इंडिया परिवार (जिनसे वह मिलती थीं) में कौन परेशानी से गुजर रहा है इसका हमेशा ख्याल रखती थीं। किसी भी कीमत पर उनकी मदद करती थीं। उनके कहने पर हम जिनको नहीं भी जानते थे तत्काल मदद करते देते थे। उनको हमेशा दूसरों को देने में मजा आता था। उनका आदर्श चरित्र था जिस पर हम सबको गुमान रहेगा।
