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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 14, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राजनाथ के बयान से बेचैनी : मंदिर के लिए पीएम से मिलेंगे नृत्यगोपालदास

By Nawal MishraEdited By:
Published: Thu, 14 May 2015 06:43 PM (IST)Updated: Thu, 14 May 2015 06:46 PM (IST)

रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ ङ्क्षसह की ओर से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा का ...और पढ़ें

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लखनऊ। रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ ङ्क्षसह की ओर से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा का सुझाव देने पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा के अनुसार गृहमंत्री राजनाथ सिंह का सुझाव पर्याप्त नहीं है। इस मामले में केंद्र सरकार को दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचय देना होगा और व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी कि सुप्रीम कोर्ट में विशेष बेंच का गठन कर मामले के शीघ्रातिशीघ्र निस्तारण करा मार्ग प्रशस्त किया जाये। मंदिर के लिए कानून बनाने के सवाल पर भी राजनाथ सिंह के प्रति उन्होंने असहमति जताई। शर्मा ने कहा कि भाजपा के पास राज्यसभा में भले ही बहुमत नहीं है पर लोकसभा में तो है, भाजपा नेतृत्व को चाहिए कि वह मंदिर के लिए पहले लोकसभा में प्रस्ताव प्रस्तुत करे। जहां तक राज्यसभा में मंदिर के लिए अपेक्षित समर्थन का सवाल है, तो इसके लिए विहिप के विशेष संपर्क सेल का उसे समर्थन मिलेगा। यह सेल मंदिर के लिए विभिन्न दलों के सांसदों से समर्थन हासिल करने की कोशिश में है।

शर्मा के अनुसार रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के नेतृत्व में संतों का एक प्रतिनिधि मंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की तैयारी में है। यह दल प्रधानमंत्री से मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने की मांग करेगा। संतों की प्रधानमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात की तारीख फिलहाल तय नहीं है पर समझा जाता है कि यह मुलाकात मई के बाद संभव है। शर्मा ने स्पष्ट किया कि मंदिर का सवाल खड़ा कर हम सरकार के काम-काज में कोई व्यवधान नहीं खड़ा करना चाहते पर सरकार को भी चाहिए कि वह मंदिर निर्माण में सहयोग करे।

रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य एवं पूर्व सांसद डॉ. रामविलासदास वेदांती ने राजनाथ ङ्क्षसह को 2013 के प्रयाग कुंभ के दौरान आयोजित धर्म संसद की याद दिलाई, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से श्री सिंह ने आश्वासन दिया था कि यदि भाजपा के केंद्र में पूर्ण बहुमत मिलता है, तो वह कानून बनाकर राम मंदिर संतों को सौंपेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सभा में बहुमत न होने पर भी सरकार को मंदिर के लिए कानून बनाने का प्रयास करना चाहिए और जरूरत पडऩे पर संसद का संयुक्त सत्र बुलाया जा सकता है। वेदांती ने याद दिलाया कि सरकार विवादित स्थल के इर्द-गिर्द अधिग्रहीत 67.77 एकड़ भूमि रामजन्मभूमि न्यास को सौंपने के लिए स्वतंत्र है और उसे ऐसा कर राम मंदिर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय देना चाहिए।