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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 07, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

महागठबंधन- कांग्रेस व सपा राजी होगी तो आप कैसे रोक लोगे : अखिलेश

By Dharmendra PandeyEdited By:
Published: Mon, 07 Nov 2016 05:23 PM (IST)Updated: Tue, 08 Nov 2016 06:26 PM (IST)

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आवास पर बैठक के बाद पता चला कि महागठबंधन की कवायद में जुटी समाजवादी पार्टी एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार करने में जुटी है।

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लखनऊ (जेएनएन)। रविवार को मिलने से इन्कार चुके मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सोमवार को चुनाव प्रबंधक प्रशांत किशोर 'पीके, के साथ दो घंटे से अधिक चली मुलाकात से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की उम्मीदें फिर परवान चढ़ती दिखने लगी। हालांकि दोनों ओर से अधिकृत तौर पर गठबंधन को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया गया। बावजूद इसके कहा जा रहा है कि भाजपा को रोकने और बसपा के पक्ष में मुसलमानों के रूझान का खौफ नजदीकियां बनाने को मजबूर कर रहा है।

ना-नुकर के बीच सपा और कांग्रेस में दोस्ती की कोशिशों का घटनाक्रम सोमवार को तेजी से बदला। सपा प्रमुख मुलायम सिंह से मुख्यमंत्री अखिलेश की प्रात: करीब दस बजे करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद नई राह खुलनी शुरू हुई। रविवार को पीके से मिलने के लिए वक्त नहीं देने वाले अखिलेश यादव मुलाकात के लिए जारी हो गए। मुख्यमंत्री आवास पर दोनों के बीच दो घंटे से अधिक चली बैठक के बाद कांग्रेस व सपा के गठजोड़ की उम्मीद नजर आई। अपने काम के बूते दोबारा सरकार बनाने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री से जब इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि गठबंधन पर कोई भी फैसला सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की करेंगे। कहा कि गठबंधन के बारे में पार्टी फोरम पर सुझाव दूंगा। इसी से जुड़े दूसरे सवाल पर अखिलेश यादव ने यह भी कह दिया कि अगर कांग्र्रेस-सपा राजी है तो आप कैसे रोक लोगे? सवाल के जरिये किये गये सवाल का संकेत तो यही है कि अब तक गठबंधन की मुखालफत कर रहे मुख्यमंत्री ने इस मुददे पर रुख नरम किया है। हालांकि फैसला होना अभी बाकी है। दूसरी ओर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव सोमवार को नई दिल्ली चले गये। मुलायम दो नवंबर को लखनऊ आए थे, जिसके बाद से लगातार यहीं थे। इससे पहले एक नवंबर को कांग्र्रेस के प्रबंधक पीके ने सपा के राज्यसभा सदस्य अमर सिंह के साथ दिल्ली में मुलायम से मुलाकात की थी।

कांग्रेस ने औपचारिक भेंट बताया : सपा से गठबंधन करने को लेकर प्रदेश कांग्रेस में एकराय नहीं है। आंतरिक असंतोष को देखते हुए कोई वरिष्ठ नेता खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं। पीके व सपा नेताओं की मुलाकात को लेकर बनी उहापोह की स्थिति के बीच प्रशांत किशोर की कंपनी आइ-पीएसी के टिवटर हैंडलर ने लिखा कि-प्रशांत व समाजवादी पार्टी के नेतृत्व के साथ शिष्टाचार मुलाकात थी, जिसमें उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा हुई है, मगर कांग्र्रेस और सपा के बीच गठबंधन पर बात नहीं हुई।

अभी समझौते में फंसेंगे कई पेंच : सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की चर्चाएं भले ही जमीन पर उतारने की कोशिशें हो रहीं हो परंतु समझौते में अभी कई पेंच भी फंस सकते है। सबसे बड़ी मुश्किल सीटों के बंटवारे में होगी। सूत्रों का कहना है कि पीके द्वारा कम से कम 125 सीटें कांग्रेस को देने की इच्छा जाहिर की गयी है। इस चर्चा में दम है तो इतनी संख्या में सीटें दे पाना समाजवादी नेतृत्व के लिए आसान न होगा। बता दे कि सपा की ओर से 375 से ज्यादा क्षेत्रों पर टिकट देकर अथवा मौजूदा विधायकों को तैयारी करने की हरी झंडी दे चुकी है। ऐसी स्थिति में कुल 403 सीट में से कांग्रेस व अन्य सहयोगी दलों के लिए सम्मानजनक सीटें देना आसान नहीं होगा।

कांग्रेस के ब्राह्मण कार्ड पर उठेंगे सवाल: प्रदेश में 27 वर्ष की बदहाली समाप्त करने और सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस द्वारा ब्राह्मण कार्ड चला गया। मुख्यमंत्री पद के लिए शीला दीक्षित को उम्मीदवार बनाकर प्रचारित किया जा रहा है। कांग्रेस की नजर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी है। रणनीतिकारों का मानना है कि ब्राह्मण और दलित वोट कांग्रेस में लौट आया तो अच्छे दिन भी आ जाएंगे। सपा से गठबंधन होता है कि ब्राह्मणों के साथ दलितों की वापसी होने की उम्मीद पर पानी फिरेगा, ऐसा तर्क देने वाले कांग्रेसियों का कहना है कि वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव से पूर्व गठजोड़ करने की कोशिशों से सबक लेना चाहिए।

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