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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 30, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अफसरों ने बरपाया कहर

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Published: Mon, 30 Sep 2013 12:47 AM (IST)Updated: Mon, 30 Sep 2013 12:48 AM (IST)

लखनऊ। मेरठ की खेड़ा महापंचायत में सब कुछ शांत था। लोग सहज अपनी बात कह रहे थे लेकिन अफ

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लखनऊ। मेरठ की खेड़ा महापंचायत में सब कुछ शांत था। लोग सहज अपनी बात कह रहे थे लेकिन अफसरों को यह रास नहीं आया। उन्होंने माहौल खराब करने के लिए लाठीचार्ज और फायरिंग का आदेश दे दिया। इन अफसरों के खिलाफ मुकदमा कायम कर जेल भेजा जाए।

यह आरोप महापंचायत में पुलिस के लाठीचार्ज व फायरिंग के गवाह बने तथा जान बचाकर भाग रहे लोगों ने लगाए। 'जागरण टीम' को नाहली गांव के जंगल में एक ट्रैक्टर ट्राली पर सवार महादेव गांव के कई दर्जन लोग, महिलाएं आदि बदहवास हालत में मिले। महिला संतोष, बीरमती और बाला ने आरोप लगाया कि शांति से पंचायत कर रहे लोगों की अफसरों ने एक नहीं सुनी। राकेश, आनंद, नवीन कुमार ने आरोप लगाया कि पंचायत में कोई भी माहौल खराब करने की बात नहीं कर रहा था, बल्कि यह चर्चा की जा रही थी कि किस प्रकार शांति बनाई रखी जाए। अफसरों से मुजफ्फरनगर दंगे के असली दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी। लेकिन अफसर तो कुछ और ही ठाने बैठे थे। ट्रैक्टर-ट्राली में सवार लोगों के शरीर पर नीले निशान पुलिस की ज्यादती की गवाही दे रहे थे। संगीता को काफी चोटें आई थी।

ग्रामीणों ने एक सुर में आरोप लगाया कि आला अफसरों ने ज्ञापन नहीं लिया तथा ग्रामीणों पर लाठीचार्ज व फायरिंग का आदेश दिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने महिला, बच्चे व बूढ़े किसी पर रहम नहीं किया। उन्होंने सभी को गिरा गिराकर मारा। ग्रामीणों ने वहां मौजूद सभी अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जेल भेजने की मांग की।

जागरण टीम को चकबंदी के ओमपाल, थानाभवन के कैड़ी गांव के रणवीर सिंह भी बदहवास हालत में खेतों की पगडंडियों पर भागते मिले। रणवीर ने बताया कि पुलिस ने आंसू गैस का गोला छोड़ा जो कि उनके सीने में लगा। जमीन पर गिरे तो पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाई। पुलिस के लाठीचार्ज के शिकार खेड़ा गांव के मास्टर प्रताप सिंह भी हुए। उनकी पीठ, हाथ पांव सभी लाठियों के वार से छिले थे। सांसद राजेंद्र अग्रवाल खेड़ा पहुंचकर उनके घर गए। सांसद अफसोस जता रहे थे, लेकिन लगभग पचास साल के मास्टर प्रताप सिंह का हौसला कम नहीं था। उनका कहना था कि लाठियों से पुलिस जनता की आवाज नहीं दबा सकेगी।

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