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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 23, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद के खिलाफ आज दाखिल होगा आरोप पत्र

By Nawal MishraEdited By:
Published: Sun, 23 Jul 2017 10:33 PM (IST)Updated: Mon, 24 Jul 2017 09:43 AM (IST)

गायत्री प्रसाद प्रजापति व उनके साथियों के खिलाफ पुलिस को आज न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करना है।

पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद के खिलाफ आज दाखिल होगा आरोप पत्र
पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद के खिलाफ आज दाखिल होगा आरोप पत्र

लखनऊ (जेएनएन)। गाजियाबाद की महिला द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर व उनके पति आइपीएस अमिताभ ठाकुर को फर्जी दुष्कर्म मामले में फंसाने को लेकर भी पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। संबंधित मुकदमे के आरोपित गायत्री प्रसाद प्रजापति व उनके साथियों के खिलाफ पुलिस को आज न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करना है। एसओ गोमतीनगर विश्वजीत सिंह के मुताबिक संबंधित मामले की विवेचना गोमतीनगर पुलिस नहीं कर रही है। मामले की विवेचना एसआइएस से हो रही है।

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संबंधित अधिकारियों के मुताबिक विवेचना के 90 दिन सोमवार को पूरे हो रहे हैं, इसी दिन आरोप पत्र दाखिल करना है। 90 दिन दिन की अवधि के बीच विवेचक को आरोप पत्र या अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करना अनिवार्य होता है। गायत्री जैसे गंभीर मामले में भी पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल करने के लिए अंतिम दिन तक इंतजार क्यों किया, यह तो पहले ही दाखिल हो जाना चाहिए था? फिलहाल संबंधित अधिकारी इस सवाल पर खुलकर बोलने से बचते नजर आए। उधर सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने एसओ गोमतीनगर से भी इस मामले पर बात की। उन्होंने बताया कि आज आरोप पत्र दाखिल हो जाएगा।

तस्वीरों में देखें-द मांक हू बिकम चीफ मिनिस्टर

नूतन ठाकुर ने बताया कि जून 2015 में दर्ज कराए गए इस मामले में प्रजापति के अतिरिक्त राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष जरीना उस्मानी, पूर्व सदस्य अशोक पांडेय व अन्य लोग भी अभियुक्त हैं। इस केस में जुलाई 2015 में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी। नूतन ने बताया कि उनके विरोध याचिका पर सीजेएम लखनऊ के आदेशों के बाद इसकी पुनार्विवेचना की गई थी। पूर्व एसएसपी मंजिल सैनी ने मार्च 2017 में इसकी विवेचना क्राइम ब्रांच को दी थी जिसके द्वारा अप्रैल, 2017 में प्रजापति को न्यायिक हिरासत में प्रस्तुत किया गया था। शेष सभी अभियुक्तों के खिलाफ विवेचना प्रचलित है।