यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 28, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सपा सरकार ने चहेतों को सड़क बनाने से पहले ही बांट दिए करोड़ों रुपये: सीएजी
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच गठजोड़ की ओर भी इशारा किया है और काम से पहले अग्रिम भुगतान पर आपत्तियां जताई है।

लखनऊ (राज्य ब्यूरो)। सपा शासन में सड़कों के निर्माण के आधार पर विकास के दावों की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने बखिया उधेड़ दी है। आॅडिट में कहा गया है कि सड़क निर्माण में नियमों को ताख पर रखते हुए मनमाने ढंग से ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया है। इंडियन रोड कांग्रेस के मापदंडों का उल्लंघन किया गया और गलत अनुमान के आधार पर सड़कों की डिजाइन तैयार की गई।
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच गठजोड़ की ओर भी इशारा किया है और काम से पहले अग्रिम भुगतान पर आपत्तियां जताई है। सीएजी ने 2011 से लेकर 2016 के बीच हुए कार्यों में हुए सरकार और कंपनियों के बीच अनुबंध पर केंद्रित अपनी रिपोर्ट का प्रकाशन किया है, जिसे गुरुवार को विधानसभा के पटल पर रखा गया है।
इसमें मार्ग विकास के नीति नियोजन पर सवाल उठाते हुए कहा कि 17 जिलों में चौड़ीकरण के 38 काम बिना ट्रैफिक गणना का प्रतिवेदन हासिल किए ही करा लिए गए। इसके साथ 47.87 करोड़ के पौधरोपण का प्रावधान पूरा नहीं किया। अनुबंध की कमियों ने ठेकेदारों को अनुचित लाभ लेने में सहायता की।
बिड मूल्यांकन एवं ठेकेदारों के चयन में प्रतिस्पर्धा पर ध्यान नहीं दिया गया। कई निविदाओं में एक या दो ठेकेदार ही शामिल हुए। 3300 करोड़ के 598 अनुबंध ऐसे रहे, जिसमें प्रतिस्पर्धा का अभाव रहा। कई ठेकेदारों की हैसियत के प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए।
सपा के शासनकाल में निर्माण और अनुरक्षण पर 40854.63 करोड़ खर्च किए गए। इसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क निर्माण योजना शामिल नहीं है। नई सड़कों के निर्माण पर 23 प्रतिशत धनराशि खर्च की गई। ऑडिट रिपोर्ट में इसमें कई कामों पर आपत्तियां जताई गई हैं।
स्वीकृति के पहले ही टेंडर: सीएजी की आॅडिट रिपोर्ट ने निविदा आमंत्रण का खामियों को विशेष रूप से उजागर किया है। कहा गया है कि लेखा परीक्षा की नमूना जांच में पाया गया कि 3071.45 करोड़ के 96 कार्यो के टेंडर अधीक्षण अभियंताओं ने शासन के प्रशासकीय अनुमोदन और वित्तीय स्वीकृत के पहले ही आमंत्रित कर दिए गए। 4.184 करोड़ रुपये के 156 कार्य, 3333.61 करोड़ रुपये के 105 कामों में तकनीकी स्वीकृति हासिल करने के पहले ही निविदाएं खोली गईं।
यह भी पढ़ें: तेल में मिलावटखोरी कर लाखों कमा रहे थे, लखनऊ में दबोचे गए
टेंडरों का प्रकाशन नहीं किया गया: नियमानुसार टेंडरों का प्रकाशन जरूरी है लेकिन 1655.36 करोड़ की 81 टेंडर नोटिसों को समाचार पत्रों में प्रकाशन के लिए निदेशक, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को नहीं भेजा गया।
यह भी पढ़ें: आगरा में पेट्रोल टैंकर और ट्रैक्टर की टक्कर, दो जिंदा जले
