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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 16, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चुनौतियों के लिए चुनौती, भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई में दबाव मुक्त: वीरेंद्र

By Nawal MishraEdited By:
Published: Wed, 16 Dec 2015 08:36 PM (IST)Updated: Thu, 17 Dec 2015 09:49 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देश के पहले लोकायुक्त नियुक्त न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह का कहना है कि भ्रष्टाचार खत्म करने ...और पढ़ें

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लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देश के पहले लोकायुक्त नियुक्त न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह का कहना है कि भ्रष्टाचार खत्म करने की राह में आने वाली चुनौतियों के लिए वह चुनौती बनेंगे। भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करायी जाएगा। निर्दोष के सम्मान बनाए रखा जाएगा।

लोकायुक्त नियुक्त किए जाने के बाद 'दैनिक जागरण ' से न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि वह बचपन से चुनौतियों का सामना करते रहे हैं। लोकायुक्त पद पर रहते हुए आने वाली चुनौती से निपटने में पीछे नहीं हटेंगे।

ऐसे समय में लोकायुक्त बने हैं, जब इस पद के साथ कई विवाद खड़े हो गए हैं? जवाब में सिंह ने कहा कि 'मैं, नहीं समझता कि लोकायुक्त पद या इस पर नियुक्ति को लेकर कोई विवाद था, या है। ' सरकार नए लोकायुक्त के लिए प्रयास कर रही थी। बैठकें हुई, दो दिनों से चयन समिति के सदस्य नए नाम पर चर्चा कर रहे थे। इसमें देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया। कहा जा रहा है कि सरकार अपना लोकायुक्त बनाना चाह रही थी, इससे चयन समिति में एका नहीं बन रहा था? जवाब में नवनियुक्त लोकायुक्त ने कहा कि यह सांविधानिक पदों आसीन हस्तियां किस बात को लेकर मंथन कर रही हैं, उस पर टिप्पणी नहीं की जा सकती है। मुझे सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया है। किसी का ठप्पा नहीं है। मंत्रियों, अधिकारियों के खिलाफ जो भी शिकायत आएगी उसकी जांच कर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

सत्ता प्रतिष्ठान से लेकर नौकरशाही तक का लोकायुक्त पद पर दबाव रहता है, इससे कैसे निपटेंगे? इस सवाल पर ने न्यायमूर्ति सिंह ने दोहराया कि वह देश के ऐसे पहले लोकायुक्त हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया है। इसके बाद प्रेशर का कोई सवाल कहां उठता है।

यूपी का लोकायुक्त अधिनियम कमजोर माना जाता है, इसकी मजबूती प्राथमिकता में होगी? जवाब मे न्यायमूर्ति वीरेंद्र ने कहा कि अधिनियम को देखने, समझने और दूसरे राज्यों के अधिनियम से तुलना करने के बाद इस दिशा में कोई फैसला होगा। उपलब्ध संसाधन और नियम के दायरे में कार्रवाई होगी।

न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा पर सपा सरकार के मंत्रियों को बचाने के इल्जामों पर श्री सिंह ने कहा कि न्यायमूर्ति मेहरोत्रा सुलझे हुए जज थे। लोकायुक्त पद पर उन्होंने बहुत काम किया। मंत्रियों, अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के भ्रष्टाचार उजागर किए और जनता को राहत दिलायी। उन पर आरोप की कोई बात मेरे संज्ञान में नहीं है। उपभोक्ता आयोग में अधिवक्ता मुवक्किल का पक्ष रखते लेकिन लोकायुक्त के यहां वकील की आवश्यकता नहीं होती, आपका रुख? श्री सिंह ने कहा कि वह भी मानते हैं पीडि़त खुद बात कहे तो बेहतर होता है, मगर निरक्षरता या अन्य कारणों से अधिवक्ता के जरिये पक्ष रखना गलत नहीं होगा।