विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 06, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

फिर दो मासूमों को निगल गया इंसेफ्लाइटिस

By Edited By:
Published: Sat, 06 Sep 2014 10:51 PM (IST)

News Article Hero Image

जागरण संवाददाता, कुशीनगर: जिले में इंसेफ्लाइटिस से होने वाली मौतों के सिलसिले पर रोक लगती हुई नहीं दिख रही। इस बीमारी ने दो मासूमों की जान ली। वहीं डेढ़ दर्जन लोगों के इसकी चपेट में होने की भी बात कही जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पूरी तरह से बेखबर बना बैठा है। गांवों में इसको लेकर दहशत है।

हाटा ब्लाक के गांव बकनहां के टोला गुनई छपरा में जापानी इंसेफ्लाइटिस से शनिवार को तड़के 4 वर्षीय मासूम की मौत हो गई।

दीनानाथ पटेल का 4 वर्षीय बेटा निहाल 2 सितम्बर को बीमार हुआ। सर में तेज दर्द के साथ बुखार हुआ। परिजनों ने स्थानीय डाक्टरों से इलाज कराया, लेकिन ठीक नहीं हुआ। मासूम को जिला अस्पताल ले जाया गया, तो वहां बीमारी की पहचान जेई के रूप में हुई। स्थिति गंभीर होने के बाद डाक्टरों ने गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। जहां मासूम ने शनिवार की सुबह दम तोड़ दिया। बच्चों का शरीर गर्म होते ही परिजन बदहवास हो जा रहे हैं। ग्रामीणों ने गांव में छिड़काव तथा शुद्ध पेयजल व सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है। ग्राम प्रधान जेपी यादव ने कहा कि गांव में छिड़काव कराया गया है। पीड़ित परिवार को हर संभव मदद की जायेगी। विशुनपुरा विकास खंड के गांव वधपरना के टोला बड़हरिया में इंसेफ्लाइटिस से पीड़ित तीन वर्षीय मासूम की मौत हो गई।

ग्रामवासी नासिर के तीन वर्षीय पुत्र अहमद रजा को एक सप्ताह पूर्व तेज बुखार हुआ। परिजन झोला छाप डाक्टर से इलाज कराना शुरू किए। दो दिन बाद सुधार न होने पर जिला अस्पताल रविंद्र नगर धूस ले गए। जहां डाक्टरों ने रोग पहचानते ही मेडिकल कालेज गोरखपुर के लिए रेफर कर दिए। जहां इलाज के दौरान शुक्रवार की देर शाम उसका मौत हो गई।

मौत के बाद उक्त टोले में दहशत का माहौल है। दूसरी ओर इस परिवार की सोनी 5 वर्ष, जाकिर हुसेन ढाई वर्ष, रोशन तारा 4 वर्ष, सानिया 5 वर्ष, खुशबुन नेशा, शायरा खातून, कुलसुम नेशा तेज बुखार की चपेट में हैं। इसके अलावा गांव के ही वाजिद 5 वर्ष, नूर सलाम, अली हुसेन 12 वर्ष, सोनू 4 माह, अरबाज 7 वर्ष, शाहिबा 2 वर्ष, साजिदा, खुशबुद्दीन, सुल्तान 5 वर्ष, आशिक 7 माह, शाहिद 6 वर्ष, कुद्दुश 2 वर्ष, जुनेजा 12 वर्ष तेज बुखार की चपेट में हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग मौत के 24 घंटे बाद भी अनभिज्ञ है।

नासिर अपने तीन वर्षीय बेटे अहमदा रजा की मौत से जितना नहीं टूटा है उससे अधिक वह इस बीमारी की चपेट में आए तीन बच्चों को लेकर परेशान है। चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं।

लगभग 400 आबादी वाले इस टोले में 3 इंडिया मार्का हैंडपंप हैं, जो पीला पानी देते हैं। गांव की पक्की नाली, कूड़ा-करकट पटी है। ग्रामीण जाहिद अली, सिराजुद्दीन, इरशाद, मुस्तकीम आदि ने बताया कि सफाई कर्मी नहीं आता है। गांव में छिड़काव भी नहीं हुआ है।

ग्राम प्रधान गुलाब शर्मा का कहना है कि छिड़काव के मद में दो वर्ष से पैसा नहीं आया है। इसलिए छिड़काव नहीं हुआ है।