यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 16, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'जिंदा लाश' बने टीबी के 19 मरीज

कौशांबी : क्षय रोग का शिकार होने के बाद जिले के 19 मरीजों को स्वास्थ्य विभाग ने एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टर्ड) घोषित कर दिया है। इन मरीजों पर दवा का भी असर नहीं होता है। स्थिति यह बन गई है कि क्षय रोग से पीड़ित मरीज जिंदा लाश बने हुए हैं। लंबे समय से बीमारी से जूझने के बाद खुदा से मौत की भीख मांग रहे हैं।
राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण अभियान के तहत टीबी जैसी जानलेवा बीमारी को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसमें सरकार का प्रतिवर्ष लाखों रुपये खर्च हो रहा है, लेकिन मानीटरिंग के अभाव में क्षय रोग से पीड़ित मरीजों को इसका बेहतर लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से क्षय रोग जैसी बीमारी जानलेवा साबित हो रही है। समय पर मरीजों का इलाज न शुरू होने की वजह से जिले के 19 मरीजों की हालत काफी बिगड़ गई है। छह माह तक दवा खाने के बाद कोई लाभ नहीं हुआ तो इन मरीजों को एमडीआर घोषित कर दिया गया है। बीमारी को लेकर मरीज व उनके परिजन काफी परेशान हैं।
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लखनऊ से होगी जांच
कौशांबी : काफी समय तक दवा खाने के बाद यदि टीबी से पीडि़त मरीजों को लाभ नहीं मिलता है तो उन्हें एमडीआर घोषित कर बलगम की जांच के लिए लखनऊ भेजा जाता है। जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी ने बताया कि लखनऊ से जांच रिपोर्ट आने के बाद एमडीआर मरीजों को दवा दिया जाता है। इसके बाद ही बीमारी से पीड़ित लोगों को लाभ मिलता है।
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जिले के 19 मरीजों को एमडीआर घोषित कर दिया गया है। इनकी हालत काफी नाजुक है। कुछ मरीजों के बलगम की जांच लखनऊ के लैब से कराई जा चुकी है और उनका इलाज भी शुरू कर दिया है। कुछ मरीजों के बलगम को जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है।
-एसएन त्रिपाठी, जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी
