यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 09, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अब महोलिया गांव में फैली बीमारी
भोगनीपुर, संवाद सहयोगी : अहरौली शेख गांव के बाद महोलिया गांव में भी बुखार ने पांव पसार दिये हैं। शुक

भोगनीपुर, संवाद सहयोगी : अहरौली शेख गांव के बाद महोलिया गांव में भी बुखार ने पांव पसार दिये हैं। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने दोनों गांवों में बुखार पीड़ितों का उपचार किया।
अमरौधा ब्लाक के अहरौली शेख गांव में डा. गिरिराज की अगुवाई में टीम ने बुखार से पीड़ित मो. अहमद, सानिहाल, सफीकुन, रफीउल्ला व काजमी के खून की स्लाइड बनाई तथा गांव के मैनाज, गुलफिसा, अरसला, नाजमी, यासमीन, रिजवान, इरशाद, मो. अजहर, कसिस, शहाना, निदा, मो. रजी, मकबूल, नईमा, खुशनुमा, दिब्बन बेगम आदि मरीजों को दवाएं दी। पीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रविप्रकाश ने बताया कि अहरौली शेख गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पांच बुखार पीड़ित मरीजों की रक्त स्लाइड बनाई है तथा 16 मरीजों का उपचार किया गया है। शनिवार को भी टीम गांव जायेगी।
उधर मलासा ब्लाक के महोलिया गांव में बीमारी की सूचना पर पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एके वर्मा, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सुरेश सचान की टीम ने चिकनपाक्स से पीड़ित इंदल सिंह की पुत्री अनामिका व उसके भाई शिवम का उपचार किया। इसके अलावा अजय कुमार, कोमल व फूलसिंह आदि मरीजों का उपचार कर दवाएं दी। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के विनीत कुमार की पत्नी सीता (25) की दो दिन पूर्व बुखार से हालत बिगड़ थी, इसलिए उसे कानपुर अस्पताल ले जाया गया। ब्लाक के कछगांव गांव में भी बुखार से पीड़ित शैलेंद्र सिंह की पत्नी रीमा देवी व पुत्र अभय सिंह को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से उन्हें कानपुर रेफर किया गया था। दोनो का निजी नर्सिग होम में इलाज चल रहा है। शैलेंद्र सिंह ने बताया कि डाक्टरों ने रीमा को डेंगू बुखार होने की पुष्टि की है।मलासा के प्रभारी चिकित्साधिकारी ने बताया कि महोलिया गांव में अनामिका व शिवम की हालत में सुधार हो रहा है। बुखार से पीड़ित मरीजों को दवाएं दी गई हैं। कछगांव गांव में बुखार के मरीज होने की जानकारी नहीं है।
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बुखार से युवक की मौत
भोगनीपुर : बरौर के बुखार से पीड़ित युवक की शुक्रवार को कानपुर के निजी नर्सिग होम में इलाज के दौरान मौत हो गई। शिवराम ने बताया कि पुत्र समरजीत (25) को दस दिन पूर्व बुखार आया था। उसे जिला अस्पताल ले जाने पर कानपुर रेफर कर दिया गया था। निजी नर्सिग होम में भर्ती कराने पर डॉक्टर ने जांच के बाद डेंगू की पुष्टि की थी। शुक्रवार को दोपहर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शाम को शव बरौर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। मलासा ब्लाक के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. एके वर्मा ने बरौर गांव के डेंगू से पीड़ित मरीज की मौत की जानकारी से इंकार किया है।
