यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 21, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कई राज्यों में सिक्कों का संकट दूर करता है ये शहर, हर रोज होता है करोड़ों का बिजनेस
कई राज्य हैं जहां सिक्कों का अब भी संकट है। दिल्ली, मुंबई, सूरत, हैदराबाद आदि स्थानों पर सिक्कों की ज्यादा ...और पढ़ें

कानपुर (जेएनएन)। कानपुर यूं तो कपड़ा, मसाले, गल्ले और ऐसे ही तमाम उत्पादों के बड़े कारोबार का केंद्र है जिन्हें दूसरे राज्यों तक भेजा जाता है लेकिन, इसका एक कारोबार ऐसा भी है जिसके बारे में लोग ठीक से जानते तक नहीं। यह कारोबार है सिक्कों के विनिमय का। वर्तमान दौर में शहर में सिक्कों की बहुतायत और कई अन्य राज्यों में सिक्कों के संकट के चलते यह कारोबार तेजी से फलफूल रहा है।
नोटबंदी के बाद बैंकों ने लोगों को नोटों के बदले सिक्के तक दिए थे। इस वजह से बाजार में सिक्कों की संख्या बहुत अधिक हो गई। आज तमाम कारोबारी परेशान हैं कि उनके पास कई-कई बोरी सिक्के पड़े हैं जिन्हें बैंक नहीं ले रहे। सिक्कों की इस अधिकता का लाभ इस समय कानपुर मुद्रा विनिमय व्यापार मंडल से जुड़े सदस्य उठा रहे हैं।
व्यापार मंडल अध्यक्ष लाल सिंह के मुताबिक सिक्कों की अधिकता की समस्या कानपुर और इसके आसपास के जिलों में है। कई राज्य हैं जहां सिक्कों का अब भी संकट है। दिल्ली, मुंबई, सूरत, हैदराबाद आदि स्थानों पर सिक्कों की ज्यादा मांग है। कानपुर से खासतौर पर दिल्ली व सूरत सिक्के भेजे जाते हैं। वहां कारोबारी के पास सिक्के पहुंच जाने के बाद ही भुगतान मिलता है। इसमें सही के साथ कटे-फटे नोट भी मिलते हैं। इन नोट को कम कीमत पर लिया जाता है और शहर लाकर बैंकों में बदला जाता है।

इस तरह एकत्र होते सिक्के
नयागंज में बीच वाले कुएं के पास जमीन पर सिक्कों को बदलने का काम करने वाले छोटे स्तर के व्यापारी बैठते हैं। कुछ दूरी पर कई दुकानों में बड़े कारोबारी भी सिक्के बदलने का काम करते हैं। इनमें बमुश्किल आधा दर्जन ऐसे हैं जो बाहर सिक्के भेजते हैं।
ज्यादा कमीशन लेने के आरोप
व्यापार मंडल अध्यक्ष के मुताबिक सोमवार का रेट एक व दो रुपये वाले 100 रुपये के सिक्कों के बदले 85 रुपये का है। पांच रुपये वाले 100 रुपये के सिक्के के बदले 93 रुपये और 10 रुपये वाले 100 रुपये के सिक्के के बदले 94 रुपये का रेट है। यह मांग के हिसाब से घटता, बढ़ता है। दूसरी ओर कानपुर चाय उद्योग व्यापार मंडल महामंत्री श्याम अग्रहरि के अनुसार उनके इससे कहीं ज्यादा रुपये काटे जाते हैं। एक व दो रुपये के सिक्कों पर 22 रुपये तक काटे जाते हैं। वहीं पांच रुपये के सिक्के पर 12 रुपये व 10 रुपये के सिक्कों पर नौ रुपये की कटौती की जाती है।
पक्के पर्चे पर भेजे जाते सिक्के
कारोबारियों के मुताबिक ये सिक्के चाहे रोडवेज बस से भेजे जाएं या किसी अन्य ट्रांसपोर्ट से, उन्हें पक्के पर्चों पर ही भेजा जाता है। कई तो आयकर तक देते हैं।

इन कारोबार में आते अधिक सिक्के
ब्रेड, दूध, मसाला, खुली चाय, किराना की दुकानें आदि से।
सिक्के ले जाना अपराध नहीं
रिजर्व बैंक ने अपने पत्र में खुद कहा हुआ है कि व्यापार के लिए सिक्के लेना या देना कोई अपराध नहीं है। कितने भी सिक्के रखना या देश में कहीं भी ले जाना अपराध नहीं है।
