यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 21, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
19 दिन में 13 बच्चों ने दम तोड़ा

कानपुर, जागरण संवाददाता : हैलट के बाल रोग चिकित्सालय में डॉक्टरों की संवेदनहीनता के चलते समय से इलाज न मिलने के कारण चार बच्चों की मौत को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। पता चला है कि बालरोग विभाग में बीते 19 दिनों में 13 बच्चों की मौत हो चुकी है। इससे रविवार की घटना के साथ अन्य बच्चों की मौत पर भी सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) टीम सीओ ज्ञान सिंह की अगुवाई में सोमवार को हैलट के बाल रोग चिकित्सालय में बच्चों की मौत के मामले की जांच करने पहुंची। अस्पताल की व्यवस्था को लेकर तीमारदारों से जानकारी लेने के बाद खुफिया ने विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव से पूछताछ की। विभागाध्यक्ष ने बताया चिकित्सालय में एक से 19 जनवरी तक 134 बच्चे भर्ती हुए। इनमें 13 बच्चों की मौत मल्टी आर्गन फेल्योर से हुई है, जबकि 75 की जान बचा ली गई। रविवार को दो बच्चों उन्नाव निवासी रोशन की निमोनिया से एवं फतेहपुर के अंश की मौत मेनेंजाइटिस से हुई थी।
एक बेड पर तीन-तीन बच्चे
क्यों किए भर्ती?
बाल रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव से एलआईयू ने पूछा कि एक बेड पर तीन-तीन बच्चे क्यों भर्ती किए, क्या इससे संक्रमण हो सकता है और किसी की जान जा सकती है? जवाब में अस्पताल में बेड की कमी होना कारण बताया गया। इस पर एलआईयू ने पूछा कि बेड बढ़ाने के लिए क्या कोई मांग या लिखापढ़ी हुई है? विभागाध्यक्ष इसका जवाब नहीं दे सके।
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