यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 20, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बाढ़ के बाद बढ़े संक्रामक रोगी

उरई, जागरण संवाददाता : एक माह पहले हुई भीषण बारिश एवं बाढ़ से जिले की चौथाई आबादी प्रभावित हुई। जलभराव के बाद निकली धूप से संक्रामक रोगों का सिलसिला थम नहीं रहा है। जिससे जिला चिकित्सालय, सीएचसी व पीएचसी संक्रामक रोग के मरीजों में चार गुना बढ़ोत्तरी हो गई है।
गौरतलब है कि पानी में डूबने एवं मकानों के गिरने से दबकर 16 लोगों की जानें चली गईं और दर्जनों पशु पानी में बह गए। जलभराव से पैदा हुई सड़ांध एवं नहाने-धोने साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था न होने के कारण संक्रामक रोगों की चपेट में लोग आ रहे हैं। जिससे सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों में मलेरिया, पीलिया, टाईफाइड तथा वायरल बुखार के मरीजों की सुबह से लंबी लाइनें लग रही हैं। उदाहरणस्वरूप अतिवृष्टि विभीषिका से पहले जिला चिकित्सालय की लैब में जहां रोजाना मात्र 150 मरीजों की खून, यूरिन आदि की जांचें होती थीं। अतिवृष्टि के बाद 20 अगस्त के बाद यह मरीजों की संख्या बढ़ते-बढ़ते आज 350 मरीजों में पहुंच गई है।
4 टेक्नीशियन और 350 जांचे
जिला चिकित्सालय में तैनात लैब टेक्नीशियन जितेन्द्र गुप्ता, बृजेश दुबे, सुशील दुबे व राजेन्द्र सिंह गुर्जर पर इन दिनों एकाएक कार्य का बोझ बढ़ गया है। आज कल संक्रामक रोगों के फैलने की वजह से उन्हें प्रतिदिन 350 से अधिक जांचें करनी पड़ रही हैं। इसके बावजूद भी मरीज बगैर जांच के बैरंग लौट रहे हैं।
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