यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 22, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मासूमों पर मौत का झपंट्टा

संवाददाता, हाथरस : जानलेवा बुखार का प्रकोप ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी मलिन बस्तियों में भी फैल रहा है। इसकी चपेट में सबसे ज्यादा गरीब तबके के लोग आ रहे हैं। पिछले 15 दिन से बुखार में पीड़ित चार वर्षीय बच्चे की शनिवार की सुबह मौत हो गई। इस बच्चे का उपचार एक नर्सिग होम में चल रहा था। वहां तबियत ज्यादा बिगड़ी तब डॉक्टर ने बच्चे को जिला अस्पताल ले जाने के लिए कहा।
जिले में वायरल का प्रकोप तो है ही, कई क्षेत्रों से डेंगू की भी शिकायतें आ रही हैं। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में ही बीमारी फैलने की खबरें आ रही थीं, मगर अब शहरी क्षेत्र की मलिन बस्तियों में भी वायरल का प्रकोप है। शनिवार को लाला का नगला निवासी एक चार वर्षीय बच्चे की बुखार के चलते मौत हो गई।
चार वर्षीय शुभम पुत्र संजय पिछले पंद्रह दिन से बुखार से पीड़ित था। प्राइवेट नर्सिग होम में उसका उपचार चल रहा था। हालात में सुधार न होने पर शनिवार की सुबह परिजन शुभम को लेकर चामड़ गेट स्थित नर्सिग होम पर गए। बच्चे के दादा अमीरचंद ने बताया कि डॉक्टर ने 625 रुपये के टेस्ट के बताए। 130 रुपये फीस के देने थे। वह पैसे का इंतजाम करने गए थे। जब वह लौटे शुभम की तबियत और बिगड़ गई। हाथ-पैर अकड़ने लगे। इसके बाद चिकित्सक ने सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया। परिजन शुभम को रिक्शे में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। ओपीडी में दिखाया, जहां से उसे इमरजेंसी में ले जाया गया। डॉक्टरों ने शुभम को ब्रॉड डेड घोषित कर दिया। शुभम की मौत की खबर सुनकर परिजनों का बुरा हाल था।
बच सकता था मासूम : यह बात काफी हद तक सही है कि अपने लाभ के लिए निजी चिकित्सक मरीज व उनके तीमारदारों को खूब घुमराह करते हैं। यदि समय रहते मासूम को ठीक उपचार मिलता तो उसकी जान नहीं जाती। एक हफ्ते से नर्सिग होम के डॉक्टर शुभम का उपचार कर रहे थे। परिजनों के हजारों रुपये फुंक गए, मगर नतीजा दुखद रहा।
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