यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 25, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
22 दिन में बुखार ने ली नौ जिंदगी
हरदोई-अहिरोरी: हद हो गई। स्वास्थ्य विभाग बुखार तक नहीं उतार पा रहा है। अहिरोरी विकास खंड के खाड़ाखेड़ा

हरदोई-अहिरोरी: हद हो गई। स्वास्थ्य विभाग बुखार तक नहीं उतार पा रहा है। अहिरोरी विकास खंड के खाड़ाखेड़ा के मजरों में पिछले कई दिनों से बुखार फैला है। दर्जनों परिवार बीमारी की चपेट में हैं। कहने को तो स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच भी कर चुकी और दवा भी वितरित हो रही है लेकिन गांवों की हालत खराब है। बुखार का तांडव जारी है और देखा जाए तो 22 दिन में नौ की मौत हो चुकी है। वहीं काफी संख्या में अभी भी लोग बीमारी से तड़प रहे हैं।
खाड़ाखेड़ा के मजरा उमरी, बेलहा और खोपरा में पिछले कई दिनों से बुखार का प्रकोप है। शुरुआत में एक दो बीमार हुए लेकिन धीरे धीरे बीमारी फैलती गई है। ग्रामीणों का कहना है कि तेज बुखार आता है और उसी में मरीज चारपाई पकड़ लेते हैं। तीनों मजरों में ऐसा कोई घर नहीं है जिसमें बुखार का प्रकोप न हो। बीमारी फैली तो अहिरोरी सीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी की टीम गांव पहुंची तो जिला मुख्यालय से भी टीम गांव गई। मरीजों को दवा बांटी गई और छिड़काव भी कराया गया लेकिन दशा नहीं सुधरी है और बुखार का तांडव जारी है। ग्रामीणों की मानें तो 22 दिन में तीनों गांवों में करीब नौ लोगों की मौत हो चुकी है। उमरी में तीन तारीख को कृष्णावती, छह को हेमराज और 18 को चंदारा की मौत हो गई। बेलहा में 17 तारीख को दो मौतें हुई। 17 वर्षीय राहुल और 52 साल के रामकुमार बुखार की भेंट चढ़ गए। 23 तारीख को मालती की मौत हो गई। सबसे ज्यादा खराब हालत खोपरा गांव की है। ग्रामीणों के अनुसार यहां पर तो बुखार का तांडव मचा हुआ है। 17 तारीख को 60 साल के भारत, 19 को धनावती और 23 को कन्हैयालाल की दो वर्षीय पुत्री नैंसी की मौत हो गई। वहीं परवेश ( 15), रंजना ( 5), रुची ( 10), जूली (3) और राधिका ( 2) की हालत खराब है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव आई थी, दवा देकर लौट गई। जांच भी हुई लेकिन अब तो केवल खाना पूर्ति हो रही है और केवल पैरासीटामाल दी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बुखार फैलता जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग बस गोली बांटने में जुटा है।
गांव में 10 मरीज मलेरिया के निकले
बुखार का तांडव देखकर ग्रामीण ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के अंदर भी डर बैठा है। अहिरोरी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. मनु शर्मा ने बताया कि जांच हुई है। स्थानीय और जिला स्तर की टीम ने करीब 350 मरीजों की जांच की है। जिसमें 10 मरीजों को मलेरिया निकला है। जिसका उपचार भी चल रहा है। उनका कहना है कि ग्रामीण भी जागरुक नहीं हो रहे हैं और जांच के लिए कोई नहीं आ रहा है। डा. शर्मा ने बताया कि जांच में पुष्टि के बाद ही मरीजों को दवा दी जा सकती है। मलेरिया के रोगियों के उपचार और परिवार को दवा दी गई है। जिन लोगों ने जांच नहीं कराई उन्हें केवल पैरासीटामाल देना मजबूरी है। कहीं उन्हें कोई दूसरा बुखार हुआ तो अन्य गोली हानिकारक हो सकती है। डा. शर्मा ने बताया कि करीब 10 गांव बीमारी की चपेट में आए थे। खाड़ाखेड़़ा के तीनों मजरों में खोपरा में मरीजों की संख्या ज्यादा है।
क्या कहते हैं ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच करने तो आई और दवा बांटकर भी चली गई लेकिन ऐसे भी बहुत से गरीब मरीज हैं जिनका कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों की मांग है कि जिला स्तरीय टीम गांव में शिविर लगाकर मरीजों की जांच कराए और फिर उन्हें दवा दी जाए।
क्या कहतीं हैं प्रधान
ग्राम प्रधान मंजू गुप्ता ने बताया कि गांव में छिड़काव करा दिया गया है। नालियों में चूना भी डलवाया गया। साफ सफाई की पूरी व्यवस्था है। बीमारी फैलने की स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी गई। टीम भी आई और बीमार मरीजों का समुचित उपचार कराया जा रहा है। प्रधान का कहना है कि गांव में मरीजों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
