यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 29, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जहरीले भोजन से हुई बच्चों की मौत!

पिहानी, संवाद सूत्र : सहादत नगर में तीन बच्चों की बुधवार को हुई मौत के बाद गुरुवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डा. वीके गुप्ता ने गांव पहुंच कर पीड़ित परिवारों से पूछताछ की। उन्होंने मौत का कारण विषाक्त भोजन करने से बच्चों की मौत बताई। साथ ही स्वास्थ्य टीम को एक हफ्ते तक गांव में कैंप करने के निर्देश दिए। सीएमओ के मुआयने में दो कर्मी अनुपस्थित भी पाए गए।
गुरुवार दोपहर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. वीके गुप्ता सहादत नगर पहुंचे। उन्होंने मृत तीन बच्चों के परिजनों से मुलाकात की और पूरी हकीकत जानने का प्रयास किया। तीनों ही बच्चों ने पास के तालाब से निकाली गई मछली का भोजन करने की बात परिजनों ने बताई। बताया गया कि मंगलवार रात भोजन करने के बाद बच्चों के पेट में दर्द हुआ तो परिवारीजन उन्हें लेकर पास के मोहम्मदी खीरी जनपद लेकर एक चिकित्सक के पास पहुंचे, जहां इलाज कराया और कुछ ठीक महसूस करने के बाद अलग-अलग वापस लौट रहे थे, तभी तीनों की एक-एक कर मौत हो गई। सीएमओ श्री गुप्ता ने सीएचसी प्रभारी जितेंद्र श्रीवास्तव से गांव में हैंडपंपों, कुओं को संक्रमित करने व साफ सफाई कराने के निर्देश दिए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम को एक सप्ताह तक कैंप करने के लिए कहा। सीएमओ ने वापसी में सीएचसी का भी मुआयना किया। जिसमें कनिष्ठ लिपिक गया प्रसाद व लिपिक अनूप सिन्हा अनुपस्थित पाए गए। सीएचसी में चल रहे स्पेशल टीकाकरण और प्रसव कक्ष का भी मुआयना किया। वार्ड में भर्ती मरीजों से हालचाल पूछा व सहादत नगर के एक आठ वर्षीय बच्चे अंकित का भी हालचाल पूछा। इस दौरान जिला कंट्रोल रूम प्रभारी डा. एके गुप्ता, पिहानी सीएचसी प्रभारी डा. जितेंद्र श्रीवास्तव, दिवाकर शुक्ला आदि मौजूद थे।
मछली तो सभी ने खाई फिर औरों पर क्यों नहीं पड़ा प्रभाव
हरदोई: स्वास्थ्य विभाग बच्चों की मौत के मामले में डायरिया से इन्कार कर जहरीले भोजन की बात कह रहा है लेकिन हकीकत उनके दावों पर सवालिया निशान लगा रही है। राकेश के पुत्र अनूप, रामाधार के पुत्र बीरु और मंगू की दो वर्षीय नातिन की मौत हो गई, लेकिन इन बच्चों के घर में और कोई बीमार तक नहीं हुआ। अब अगर जहरीली मछलियां खाने से बच्चे बीमारी का शिकार हुए तो औरों पर क्यों नहीं असर पड़ा। बच्चों ने तो कम ही खाया होगा बड़ों ने तो ज्यादा ही खाया होगा।
