यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 15, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
60 फीसद एईएस मरीजों से स्क्रब टायफस वायरस
गोरखपुर : इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को बीआरडी मेडिकल

गोरखपुर :
इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को बीआरडी मेडिकल कालेज परिसर में मौजूद नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलाजी में आयोजित डाक्टर-वैज्ञानिक संवाद के दौरान एईएस की वजहों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस अब अबूझ पहले नहीं रही। एईएस के 60 फीसद मरीजों में स्क्रब टायफस वायरस के लक्षण मिले हैं।
आइसीएमआर की वैज्ञानिक डा. निवेदिता गुप्ता ने बताया कि इंसेफ्लाइटिस के मरीजों के इलाज में सबसे बड़ी समस्या वायरस के पहचान की थी। एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिण्ड्रोम (एईएस) के 80 फीसद मरीजों में बीमारी का कारण पता नहीं चल रहा था। लेकिन पिछले दो वर्षो में शोध के दौरान इसमें काफी हद तक सफलता मिली है। शोध अध्ययन में एईएस के 60 फीसद मरीजों में स्क्रब टॉयफस वायरस के लक्षण मिले। संवाद के दौरान बीआरडी के बालरोग विभाग की अध्यक्ष महिमा मित्तल ने भी इसका समर्थन किया। डा. महिमा ने बीते दो साल से भर्ती मरीजों के खून की जाच रिपोर्ट के आधार पर प्रस्तुति भी दी। उन्होंने कहा कि मरीजों के खून के नमूनों की जाच रिपोर्ट चौंकाने वाली रही। सिर्फ बच्चों ही नहीं बल्कि वयस्कों में भी स्क्रब टायफस वायरस मिला है। इस दौरान एनआइवी के प्रभारी डा. वीपी बोन्द्रे ने बीते एक दशक के मरीजों का आकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक एनआइवी में 240 मरीजों के खून के नमूनों की जाच की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें सात मरीजों में जापानी इंसेफ्लाइटिस और सात मरीजों के खून के नमूनों में स्क्रब टायफस वायरस पाया गया। संवाद में कमिश्नर अनिल कुमार, मेडिकल कालेज प्राचार्य प्रो. राजीव मिश्रा, ए डी हेल्थ डा. पुष्कर आनन्द, डा. मनोज मुरहेकर, डा. अशोक पांडेय, डा. कफील खान के अलावा गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर के सीएमओ आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता आइसीएमआर के मुख्य वैज्ञानिक डा. एमडी गुप्ते और आभार ज्ञापन डा.वीपी बोंद्रे ने किया।
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जिला अस्पतालों में नहीं हैं जरूरी सिरप
गोरखपुर : संवाद के दौरान जिलों से आए सीएमओ ने आइसीएमआर के वैज्ञानिकों को बताया कि इंसेफ्लाइटिस का सर्वाधिक शिकार बच्चे होते हैं। इससे बचाव के लिए एजिथ्रोइसिन सिरप बेहद जरूरी होता है लेकिन यह इन दिनों अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। सभी ने इसे उपलब्ध कराने की बात कही। इस क्रम में आइसीएमआर के वैज्ञानिकों ने बताया कि डाक्सीसाइक्लिन और एजिथ्रोइसिन दोनों ही दवाएं स्क्रब टायफस पर नियंत्रण के लिए बेहद कारगर हैं।
