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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 30, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ईटीसी पर मिलेगी स्क्रब टाइफस इंसेफ्लाइटिस की दवा

By JagranEdited By:
Published: Fri, 30 Jun 2017 01:07 AM (IST)

गोरखपुर: अब इंसेफ्लाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर दर्जा प्राप्त गोरखपुर व बस्ती मंडल के स्वास्थ्य केंद्रों पर

ईटीसी पर मिलेगी स्क्रब टाइफस इंसेफ्लाइटिस की दवा
ईटीसी पर मिलेगी स्क्रब टाइफस इंसेफ्लाइटिस की दवा

गोरखपुर: अब इंसेफ्लाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर दर्जा प्राप्त गोरखपुर व बस्ती मंडल के स्वास्थ्य केंद्रों पर भी स्क्रब टाइफस इंसेफ्लाइटिस की दवा मिलेगी। इन अस्पतालों में डाक्सीसाइक्लिन व एजिथ्रोमाइसिन उपलब्ध कराने के निर्देश सीएमओ को दे दिए गए हैं।

बताया जाता है कि तीन जुलाई से विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय टीम इन स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा करने वाली है। टीम इंसेफ्लाइटिस के मरीजों में स्क्रब टाइफस जीवाणु के लक्षणों व इलाज का भी अध्ययन करेगी।

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क्या है स्क्रब टाइफस

अब तक मच्छर से होने वाले जापानी इंसेफ्लाइटिस व जलजनित बीमारी के अलावा बड़ी तादाद में मरीजों में स्क्रब टाइफस जीवाणु की पुष्टि हो चुकी है।

यह जीवाणु चीलर (जंगल-झाड़ियों में रहने वाले चूहे पाया जाने वाले खास तरह का जूं) में पाया जाता है। इसी को देखते हुए अब इंसेफ्लाइटिस के सभी मरीजों को एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन या डाक्सीसाइक्लिन देने का निर्णय लिया गया है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के जिलों में एईएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) रोग उत्पन्न करने वाले कारकों की पहचान के लिए भारत सरकार, अमरीका की संस्था सीडीसी अटलांटा, निम्हांस बंगलोर तथा नेशनल इन्स्टीच्यूट आफ वायरोलॉजी पुणे द्वारा शोध किया जा रहा है। एईएस रोगियों के रक्त की जांच में इंसेफ्लाइटिस उत्पन्न करने वाले स्क्रब टाइफस की पहचान की गई है। इसी के बाद से अधिकारियों से कहा गया था कि अस्पतालों में पहुंचने वाले सभी मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन या डाक्सीसाइक्लिन का प्रयोग कर इलाज किया जाए। एईएस के रोगियों को भी यही दवा दी जाए। यदि आगे जांच के किसी अन्य रोग की पुष्टि हो तो उस बीमारी का इलाज किया जाए।

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