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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 15, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इंसेफ्लाइटिस से गोरखपुर मंडल में सर्वाधिक मौतें

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Published: Thu, 15 Dec 2016 12:59 PM (IST)

गोरखपुर समूचा पूर्वाचल, आसपास के जिले, बिहार व नेपाल इंसेफ्लाइटिस की चपेट में है पर गोरखपुर मंडल

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गोरखपुर

समूचा पूर्वाचल, आसपास के जिले, बिहार व नेपाल इंसेफ्लाइटिस की चपेट में है पर गोरखपुर मंडल में हालात चौंकाने वाले हैं। साल के अंत में यहां बीमारी से पीड़ित मरीजों व मौतों की संख्या, रोकथाम व इलाज के इंतजामों को कठघरे में खड़ा करने के लिए काफी है। गोरखपुर मेडिकल कालेज व दूसरे अस्पतालों में इस साल 3301 मरीज भर्ती किए गए, जिनमें से 576 की मौत हुई। इसमें से 415 मौतें सिर्फ गोरखपुर मंडल के चार जिलों के मरीजों की हुई जबकि 2752 मरीज यहीं के भर्ती हुए।

आंकड़ों से साफ है कि अस्पतालों में भर्ती कुल मरीजों में से 83 फीसद गोरखपुर मंडल से भर्ती हुए। कुल मौतों में से 72 फीसद से अधिक सिर्फ इसी मंडल में हुई। जिलावार बात करें तो कुशीनगर से सर्वाधिक 982 मरीज भर्ती हुए जिनमें से 134 की मौत हुई। गोरखपुर से 690 भर्ती भर्ती हुए जिनमें से 134 की, देवरिया के 657 में से 68 की जबकि महराजगंज के 403 में से 53 की मौत हुई।

इसके अलावा बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, बलरामपुर, गोंडा, मऊ, बदायूं, बलिया, अंबेडकर नगर के साथ ही बिहार, झारखंड व नेपाल से कुल मिलाकर 576 मरीज भर्ती हुए जिनमें से 161 की मौत हुई।

बहरहाल आंकड़ों से इतना तो साफ है कि बीमारी का सर्वाधिक कहर इसी मंडल में है। इसके पहले के वर्षो में भी यह होता रहा है। सरकार से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस सच से अच्छी तरह वाकिफ हैं, इसके बावजूद यहां बीमारी बेकाबू है। इसके पहले बीमारी की रोकथाम के तमाम उपाय करने के दावे किए गए। शुद्ध पेयजल, टीकाकरण, गांवों में साफ-सफाई के नाम पर भारी-भरकम खर्च हुआ। इलाज के लिए जहां स्वास्थ्य केंद्रों को पूरी तरह तैयार करने की बात कही गई। इंसेफ्लाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर खोले गए। पूर्वाचल के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र बीआरडी मेडिकल कालेज में दवा, उपकरणों के नाम पर पैसा पानी की तरह बहाया गया, पर न तो इस मंडल में भर्ती मरीजों की तादाद में कमी आई और न ही मौतों पर ही काबू पाया जा सका।

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